फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्री आनंदपुर साहिब और माता नैना देवी तक बनेगा रोपवे, पंजाब-हिमाचल के बीच समझौते पर हुए हस्ताक्षर

Fri, 28 Sep 2018 03:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
हिमाचल व पंजाब के मुख्यमंत्री
विज्ञापन

पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्री आनंदपुर साहिब और नैना देवी जी के बीच एक रोपवे स्थापित करने के लिए शुक्रवार को पंजाब और हिमाचल प्रदेश सरकारों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

विज्ञापन


संयोगवश शहीद भगत सिंह के 111वें जन्म दिवस के मौके पर आज दोनों राज्यों के बीच समझौते पर पंजाब के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के सचिव विकास प्रताप और हिमाचल प्रदेश टूरिज्म के एसीएस राम सुभाग सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी उपस्थित रहे। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में श्री आनंदपुर साहिब और हिमाचल प्रदेश में नैना देवी जी जाने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए एक ऐतिहासिक कदम के रूप में इस समझौते का स्वागत किया। उन्होंने राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह परियोजना दोनों राज्यों के लिए परस्पर लाभकारी साबित होगी। मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र में विशाल पर्यटन क्षमता पर जोर देते हुए कहा कि पर्यटन के उद्देश्य से यह फैसला इस क्षेत्र के सभी राज्यों के हित में है।

विज्ञापन

सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
इस मौके पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच इस परियोजना के महत्व को देखते हुए इसे बहुत पहले पूरा किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि हालांकि हिमाचल ने 2014 में इस परियोजना को रद कर दिया था, लेकिन कामकाज संभालते ही इस योजना के पुनरुद्धार की शुरुआत की, जिसका कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना सिख-हिंदू भाईचारे का प्रतीक है, क्योंकि यह श्री आनंदपुर साहिब और माता नैना देवी जी जैसे ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को जोड़ेगी। 

उन्होंने कहा कि हर साल 25 लाख टूरिस्ट माता नैना देवी जी आते हैं, जिनमें से 80 फीसदी पंजाब के निवासी होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में स्थापित होने वाला यह रोपवे लाखों श्रद्धालुओं को इन दो ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों की सुगम यात्रा करने में मदद करेगा। 

कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि काम को आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही कंपनी का गठन कर दिया जाएगा, जिसमें 10 निदेशक होंगे और यह दोनों राज्यों से पांच-पांच होंगे। शुरुआती सात सालों में, रियायत राशि द्वारा रियायती शुल्क का भुगतान नहीं किया जाएगा और इस परियोजना को स्थापित करने के लिए तीन साल की अवधि दी जाएगी। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि रोपवे का टैरिफ पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए सस्ता बना रहे। 

इस समझौते पर हस्ताक्षर के मौके पर पंजाब के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के अलावा हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव विनीत चौधरी, पंजाब के मुख्य सचिव करण अवतार सिंह, पंजाब के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, सीएम के मुख्य प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुरेश कुमार, प्रिंसिपल सेक्रेटरी तेजवीर सिंह, पर्यटन निदेशक एसएस जग्गी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकांत बेदी भी उपस्थित थे।
विज्ञापन

250 करोड़ की लागत, तय होगा 3.5 किमी. सफर

सांकेतिक तस्वीर
पंजाब पर्यटन विभाग ने रोपवे स्थापित करने के उद्देश्य से पंजाब क्षेत्र में लोअर टर्मिनल प्वाइंट और रास्ते के लिए 108 कनाल 13 मारला भूमि अधिग्रहित की है। इस प्रोजेक्ट को एक स्पेशल पर्पज व्हीकल स्थापित करके पीपीपी मोड में चलाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर 250 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है, जो 3.5 किलोमीटर की दूरी कवर करेगा। 

इस मार्ग पर तीन टर्मिनल प्वाइंट होंगे, जिनमें से लोअर टर्मिनल प्वाइंट (एलटीपी) श्री आनंदपुर साहिब में, टोबा में मध्य टर्मिनल प्वाइंट (आईटीपी) और माता नैना देवी जी में अपर टर्मिनल प्वाइंट (यूटीपी) बनाए जाएंगे। स्पेशल पर्पज व्हीकल के लिए कुल भुगतान इक्विटी एक करोड़ रुपये होगी, जिसमें दोनों राज्यों का 50 लाख रुपये का हिस्सा होगा। समझौते के अनुसार, इस रोपवे से प्राप्त होने वाले राजस्व में 40 साल की रियायत अवधि के साथ दोनों राज्यों का बराबर का हिस्सा होगा। 

हिमाचल ने 2014 में कर दिया था समझौता रद
उल्लेखनीय है कि श्री आनंदपुर साहिब और माता नैना देवी जी के बीच रोपवे स्थापित करने के लिए 26 जुलाई, 2012 को भी पंजाब और हिमाचल प्रदेश सरकारों के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस रोपवे के लिए पंजाब सरकार ने अपने क्षेत्र में लोअर टर्मिनल व रास्ता बनाने के उद्देश्य से 108 कनाल 13 मरला जमीन अधिगृहीत कर ली थी। लेकिन 3 जून, 2014 को हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस समझौते को रद कर दिया। 

फरवरी, 2018 में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री की ओर से इस प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने के लिए एक पत्र पंजाब सरकार को भेजा गया, जिसके जवाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के फैसले पर सहमति जताई। इसके बाद, पंजाब पर्यटन विभाग ने 5 सितंबर, 2018 को हिमाचल प्रदेश सरकार से अनुमोदित एक एमओयू प्राप्त किया। इसके बाद पंजाब कैबिनेट ने 20 सितंबर, 2018 को परियोजना को मंजूरी दे दी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें