कैप्टन अमरिंदर सिंह और राहुल गांधी
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जानकारी के अनुसार, इस बैठक में सदस्यों ने जब हार के कारणों का उल्लेख किया तब कैप्टन ने जीत के अपने कदमों को सदस्यों के सामने रखा। दरअसल, पंजाब में ही मोदी लहर का असर नहीं हो सका, जबकि अन्य सभी कांग्रेस शासित राज्यों में पार्टी को मोदी लहर का नुकसान हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में कैप्टन ने पार्टी की अगली रणनीति को लेकर भी चर्चा में हिस्सा लिया। हालांकि इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
इस बीच, यह भी पता चला है कि बैठक में मौजूदा कई सदस्यों ने हार के लिए एक-दूसरे पर भी निशाना साधा और खुद की असफलता को छिपाने की कोशिश की।
राजस्थान जहां कांग्रेस ने पांच महीने पहले ही सरकार बनाई थी, वहां लोकसभा की एक सीट भी पार्टी नहीं हासिल कर सकी। वहीं मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस का प्रदर्शन काफी खराब रहा। बैठक में इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की कारगुजारी पर सवाल उठाए गए।
गहलोत या कैप्टन अमरिंदर को कमान सौंपने की चर्चा
नई दिल्ली में जैसे ही सीडब्ल्यूसी की बैठक शुरू हुई, मीडिया में यह खबरें भी चलने लगीं कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश की है।
इसके साथ ही यह भी चर्चा शुरू हो गई कि राष्ट्रीय कांग्रेस की कमान पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह या राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंपने पर बैठक में विचार किया गया है। हालांकि इस बात की पुष्टि पंजाब कांग्रेस की ओर से नहीं की गई।