यह बात सार्वजनिक हुई और पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को पता लगी तो उन्होंने इस पर ट्वीट किया और कहा, मुझे आश्चर्य हो रहा है कि उर्दू विभाग को स्कूल ऑफ फॉरेन लैंग्वेज में शामिल किया गया है। उर्दू इंडियन भाषा है और काफी समृद्ध है, इसलिए वाइस चांसलर व सीनेटर इस पर डिस्कश करके सही करें।
पीयू का निर्णय ठीक, कुछ लोग कर रहे हैं राजनीति
कुछ शिक्षकों ने कहा है कि नैक व पीयू की ओर से पहले भी कहा गया है कि छोटे-छोटे विभागों को अगर अलग किया जाता है तो उसमें खर्च अधिक आ रहा है। पीयू पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। ऐसे में उर्दू एंड परशियन विभाग को एक साथ कर दिया जाएगा तो कोई दिक्कत नहीं होगी। विभाग का नाम है, न कि उस विभाग में अकेले उर्दू है।
कुछ शिक्षकों ने कहा है कि उर्दू को अलग विभाग करवाने के लिए साजिश व राजनीतिक की जा रही है। इसलिए इस पर ध्यान दिया जाए और जो पीयू ने प्रस्ताव तैयार किया है वह ठीक है। शिक्षकों ने पीयू प्रशासन को लिखे पत्र में यह भी कहा है कि जरूरत पड़े तो उन्हें भी सोमवार को होने जा रही बैठक में बुलाया जाए।