नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह।
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पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी कलह को सुलझाने के लिए पार्टी हाईकमान द्वारा तैयार कार्ययोजना का एलान किसी भी समय किया जा सकता है। प्रदेश मामलों के प्रभारी हरीश रावत ने साफ दिया है कि इस मामले में अब देरी नहीं की जा सकती है। संभवत: इसी हफ्ते प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश इकाई के पुनर्गठन का भी एलान होगा, जो जनवरी 2020 से लंबित है। इसी के साथ हाईकमान विधायक नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच सुलह का प्लान भी देगा।
रावत के इस बयान के बाद से पंजाब के सियासी हलकों में कई तरह की सियासी अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। माना जा रहा है कि हाईकमान नवजोत सिंह सिद्धू को सुनील जाखड़ की जगह प्रदेश अध्यक्ष का पद सौंपेगा। वहीं पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस पद पर हिंदू चेहरे को लाने के लिए कैप्टन ने लंच डिप्लोमेसी के दौरान तैयारी कर ली थी और वे इस पद के लिए कैबिनेट मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम हाईकमान के समक्ष रख चुके हैं।
जनवरी, 2020 में हाईकमान द्वारा प्रदेश इकाई भंग किए जाने के समय सुनील जाखड़ ने भी प्रधान पद से अपना इस्तीफा हाईकमान को सौंप दिया था, जिस पर कोई फैसला न लेते हुए हाईकमान ने जाखड़ को अगले आदेश तक प्रधान पद पर बने रहने का निर्देश दिया था।
दूसरी ओर, कैबिनेट विस्तार के संकेत भी हरीश रावत ने दिए हैं। इस समय प्रदेश कैबिनेट में केवल एक पद खाली है, जबकि दावेदारों के अलावा हटाए जाने वाले मौजूदा कैबिनेट मंत्रियों के नामों पर कयास ही लगाए जा रहे हैं। इस बीच, यह भी माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी कैबिनेट में नवजोत सिंह सिद्धू को डिप्टी सीएम का पद ऑफर कर सकते हैं।
इस तरह यह एक तीर से दो शिकार हो सकते हैं। कैप्टन द्वारा सिद्धू को मनाने की एक बड़ी पहल को हाईकमान द्वारा भी सराहा जाएगा, जबकि सिद्धू अब डिप्टी सीएम बनने से लगातार इनकार कर रहे हैं। अगर वे इस पद को संभालेंगे तो कैप्टन सरकार के अधूरे वादों के लिए वे भी अगले चुनाव में जवाबदेह के रूप में जनता के सामने होंगे।