पंजाब राज्य चुनाव आयोग की तरफ से 13,241 पंचायतों के चुनाव की घोषणा किसी भी वक्त की जा सकती है। सरकार सितंबर से पहले चुनाव करवाने की तैयारी कर रही है, क्योंकि चार विधानसभा सीटों डेरा बाबा नानक, चब्बेवाल, बरनाला और गिद्दड़ाबाहा के भी उपचुनाव होने हैं। इन चार हलकों से विधायकों के जून में हुए लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद ही ये सीटें खाली हुई थीं।
पंजाब में आगामी पंचायत चुनाव में कोई भी उम्मीदवार पार्टी चिह्न पर चुनाव नहीं लड़ पाएगा। राज्य सरकार पंजाब पंचायत चुनाव नियम 1994 में संशोधन की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि नियमों की धारा 12 में संशोधन किया जाएगा।
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ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मंजूरी के लिए कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। वहां से मंजूरी के बाद इन संशोधित नियमों को सितंबर में होने वाले विधानसभा सत्र में रखा जाएगा। इससे पहले ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग ने इस पर कानूनी राय भी ली थी। इसे लेकर विभाग के अधिकारियों की राज्य चुनाव आयोग के साथ एक बैठक भी हुई थी।
सरकार का मकसद है कि पार्टी चिह्न को खत्म करके गांवों में खुशनुमा माहौल बनाया जाए। इससे पंचायतों में राजनीति दूर रहेगी और सभी गांवों का विकास साथ मिलकर सही रूप से सुनिश्चित किया जा सकेगा। राज्य चुनाव आयोग की तरफ से 13,241 पंचायतों के चुनाव की घोषणा किसी भी वक्त की जा सकती है। सरकार सितंबर से पहले चुनाव करवाने की तैयारी कर रही है, क्योंकि चार विधानसभा सीटों डेरा बाबा नानक, चब्बेवाल, बरनाला और गिद्दड़ाबाहा के भी उपचुनाव होने हैं। इन चार हलकों से विधायकों के जून में हुए लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद ही ये सीटें खाली हुई थीं।
2018 में हुए थे पंचायत चुनाव
कांग्रेस सरकार के दौरान वर्ष 2018 में पंचायत चुनाव हुए थे। राज्य चुनाव आयोग ने दो सप्ताह पहले ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को पत्र लिखा था। इसमें भविष्य में होने वाले चुनाव के लिए पंचों और सरपंचों के लिए सीटें आरक्षित करने की प्रक्रिया पूरी करने को भी कहा गया था। पत्र में कहा गया था कि हर जिले में डिप्टी कमिश्नर की ओर से आरक्षण संबंधी अधिसूचना जारी की जाए, ताकि आम लोगों और उम्मीदवारों को चुनाव के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।