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Chandigarh News: सोहाना को नहरी पानी सप्लाई अटकी, गमाडा के पत्र के बावजूद नहीं पहुंचा पानी

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मोहाली। सोहाना गांव को नहरी पानी सप्लाई का मामला एक बार फिर विवादों में घिर गया है। बताया जा रहा है कि 5 फरवरी 2026 को गमाडा ने जल सप्लाई विभाग को पत्र जारी कर सेक्टर-77 स्थित वॉटर वर्क्स से पानी देने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद अब तक सोहाना तक पानी नहीं पहुंच पाया है। गमाडा ने सोहाना गांव को प्रतिदिन तीन लाख गैलन पानी सप्लाई करने की मंजूरी दी थी।
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इसके लिए 24 इंच की मुख्य पाइपलाइन से 200 मिमी डायमीटर का कनेक्शन प्रस्तावित किया गया है। इस सप्लाई को लेकर गमाडा ने पुडा नीति के तहत 14.77 रुपये प्रति किलोलीटर की दर से शुल्क वसूलने की शर्त भी रखी है, जिसमें हर साल 5 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान है। मामले में पेच यह भी है कि पाइपलाइन बिछाने, मरम्मत, मीटर लगाने और अन्य तकनीकी कार्यों की पूरी जिम्मेदारी जन स्वास्थ्य विभाग पर डाली गई है। साथ ही इन सभी कार्यों का खर्च भी विभाग को खुद ही उठाना होगा। ऐसे में यह मुद्दा केवल पानी सप्लाई तक सीमित न रहकर आर्थिक बोझ और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर भी विवाद का कारण बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेक्टर-78 और सोहाना गांव पूरी तरह नगर निगम के अधीन आते हैं, इसलिए पानी के बिल और नीतियों से जुड़े फैसले लेने का अधिकार भी नगर निगम के पास ही होना चाहिए। अलग-अलग एजेंसियों की दखल से व्यवस्था जटिल हो रही है और लोगों को राहत नहीं मिल पा रही।



अलग-अलग पानी नीति पर डिप्टी मेयर ने उठाया सवाल
डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने शहर में पानी के बिलों को लेकर अलग-अलग नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मोहाली के पुराने सेक्टरों में जहां जन स्वास्थ्य विभाग पानी की सप्लाई करता है, वहां चार मरला तक के मकानों को बिलों में राहत दी जाती है। निगम के अधीन आने वाले नए सेक्टरों में भी यही नीति लागू है, लेकिन गमाडा के अधीन क्षेत्रों में ऐसी कोई रियायत नहीं दी जा रही, जो कि सरासर नाइंसाफी है। बेदी ने मांग की कि पूरे शहर में पानी सप्लाई और बिलिंग को लेकर एक समान नीति लागू की जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र के लोगों के साथ भेदभाव न हो।
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