प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह का कनाडा दौरा कानूनी पचड़ों में फंस गया है। अमेरिका की संस्था सिख फॉर जस्टिस ने कनाडा कोर्ट में याचिका दायर कर कैप्टन को गिरफ्तार करने की मांग की है। इसके बाद कैप्टन ने कनाडा दौरा टाल दिया है। इस मामले में कनाडा कोर्ट का फैसला आने के बाद ही वह अगली रणनीति तय करेंगे।
कैप्टन ने संस्था पर पाक इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई और आम आदमी पार्टी के हाथों में खेलने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही कनाडा सरकार से अपील की है कि वह कानून का दुरुपयोग रोके।
कैप्टन के टोरंटो दौरे से ऐन पहले एसएफजे ने कनाडा कोर्ट में याचिका दायर कर दी, जिसमें कहा गया है कि कैप्टन ने सीएम रहते हुए उन पुलिसकर्मियों को प्रमोट किया, जिन्होंने आतंकवाद के दौरान में कनाडावासी सिखों पर जुल्म ढाए थे। जिसके बाद कैप्टन को अपना दौरा स्थगित करना पड़ा।
इस मामले में अदालत का फैसला आने के बाद वह रणनीति तय करेंगे। कैप्टन ने उम्मीद जताई कि ऐसे मामलों में अदालत दूसरे पक्ष को जवाब दाखिल करने को दो हफ्तों का समय देती है। इस बीच वह अपना दौरा मुकम्मल कर सकें। इससे पहले इसी संस्था की अपील पर कैप्टन की रैलियां भी रद्द की गई थीं।
कैप्टन ने कनाडियन अथॉरिटीज से कहा कि कानून का मकसद लोगों केअधिकारों की रक्षा करना है। एसएफजे जैसे ग्रुप की ओर से इसका दुरुपयोग नहीं होने देना चाहिए, जिनके संदिग्ध आधार के बारे में हर कोई जानता है। उन्होंने भारत सरकार से भी यह मुद्दा कनाडा सरकार के समक्ष उठाने की अपील की। कैप्टन ने एसएफजे के आरोपों को भी नकारा। उन्होंने कहा कि उनका मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल बहुत शांतिपूर्ण था।
पिछले दस सालों में किसी ने शिकायत नहीं की। अब उनके कनाडा दौरे से पहले ऐसी शिकायत की गई। आतंकवाद के समय ज्यादती करने वाले पुलिस अफसरों को अदालतों से पहले ही सजाएं मिल चुकी हैं। कैप्टन ने आरोप लगाया कि एसएफजे भारत विरोधी ताकतों के हाथों में खेल रही है। एसएफजे ने पाक के खिलाफ कभी शिकायत नहीं की। आम आदमी पार्टी के नेता एचएस फूलका का विरोध नहीं किया।