पंजाबी भाषा को लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी में विवाद गहराता जा रहा है। पंजाबी भाषा को लागू करवाने को लेकर दस छात्र संगठन एक मंच पर आ गए। उन्होंने एक स्वर में कहा कि पहली भाषा के रूप में पंजाबी लागू हो, उसके बाद अन्य भाषाएं। उन्होंने मांग उठाई कि छात्रों को पेपर देने का हक पंजाबी भाषा में मिलना चाहिए। इसके अलावा रिसर्च का हक भी पंजाबी भाषा में दिया जाए।
साथ ही किताबों का भी ट्रांसलेशन छात्रों की मांग के आधार पर किया जाना चाहिए। शुक्रवार की शाम पीयू कैंपस में स्टूडेंट नेताओं ने बैठक की। इसमें आइसा, एनएसयूआई, एसएफएस, पीएसयू ललकार, सत्थ, एसएफआई आदि संगठनों के नेता शामिल हुए। इस दौरान नेताओं ने कहा कि वह हिंदी का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन यहां की क्षेत्रीय भाषा पंजाबी है इसलिए उसी में छात्रों का पढ़ने का हक मिलना चाहिए ताकि उन्हें दिक्कतें न आएं।
इस दौरान मां बोली चेतना मंच की ओर से 30 अक्तूबर को होने वाले सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। स्टूडेंट नेताओं ने बताया कि इस सेमिनार में यह बताया जाएगा कि पीयू में पंजाबी भाषा ही क्यों पहले नंबर पर होनी चाहिए। उसकी महत्ता बताई जाएगी। पीयू में हिंदी भाषा में लिखे शब्दों पर पोती गई कालिख का भी विरोध हुआ। इसकी जांच की मांग की गई। साथ ही सीसीटीवी के फुटेज निकालकर आरोपी लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई।