पंजाब यूनिवर्सिटी में नेशनल सेमिनार
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पंजाब यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग ने सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए एक नई पहल की है, जिसे डीजीपी ने खूब सराहा। हिन्दी विभाग ने हरियाणा ट्रैफिक और हाइवे पुलिस और करनाल की शुरूआत समिति एक साथ आए हैं। मंगलवार से हिन्दी विभाग में आयोजित दो दिन की राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता करने वाले नाटक जिंदगी न मिलेगी दोबारा का मंचन किया गया। संगोष्ठी में दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ।
हरियाणा के डीजीपी डॉ कुशलपाल सिंह और राज्य सूचना आयुक्त समीर माथुर न हिन्दी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ गुरमीत सिंह की पुस्तक हिन्दी बदलता परिवेश और डीआईजी (ट्रैफिक और हाइवे)शिवास कविराज द्वारा संपादित पुस्तक सड़क संसार का लोकार्पण किया। माथुर ने कहा कि दोनों पुस्तकें एक तरह से जनता की पुस्तके हैं, और आम आदमी को जोड़ती हैं।
इस अवसर पर साहित्य अकादमी नई दिल्ली के पूर्व उपसचिव बृजेंद्र त्रिपाठी और वरिष्ठ पत्रकार हरिमोहन शर्मा और भाषा सिंह और बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद थे। हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार सभ्रवाल ने संगोष्ठी के बारे में जानकारी दी। जबकि डॉ गुरमीत सिंह ने विषय की प्रस्तावना करते हुए कहा कि साहित्य को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए हमें नया दृष्टिकोण अपनाना होगा।
हरियाणा डीजीपी डॉ कुशलपाल सिंह ने हिन्दी विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य समाज में जागरूकता लाने के लिए सबसे बड़ा माध्यम हो सकता है। डीआईजी (ट्रैफिक और हाइवे) शिवास कविराज ने सड़क हादसों से संबंधित आंकड़े रखते हुए कहा कि इन हादसों में हर वर्ष जितनी जाने जाती हैं। बुधवार को संगोष्ठी के दूसरे सत्र में हिन्दी के बदलते परिवेश पर ही चर्चा की जाएगी जिसमें नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा, हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव( शिक्षा) पीके दास और चंडीगढ़ के उपायुक्त अजीत बालाजी जोशी भी शामिल होंगे।