पंजाब यूनिवर्सिटी की सैफ लैब में होने वाले रसायनों की जांच का शुल्क को कम नहीं किया जाएगा। इसके अलावा लैब अपग्रेड भी नहीं हो पाएगी। पीयू प्रशासन का कहना है कि यदि ऐसा किया गया तो आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और साथ ही मशीनों का रखरखाव भी पूरी से तरह नहीं हो पाएगा। हाल ही में छात्रों ने पीयू के रिसर्च स्कॉलर के लिए नमूनों की जांच का शुल्क कम करने या माफ किए जाने को लेकर दो बार प्रोटेस्ट किया था। इसी के मद्देनजर पीयू प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है।
साथ ही पीयू प्रशासन ने विद्यार्थियों को संदेश भेजा है कि पहले ही उन्हें 20 फीसदी छूट जांच में दी जा रही है और आगे संभव नहीं है। आंकड़ों पर गौर करें तो देश भर में सैफ लैब की संख्या 13 है। इसमें पीयू के अलावा दिल्ली, मद्रास, मुंबई, गुवाहाटी, लखनऊ आदि स्थान शामिल हैं। लैब का शुल्क नई दिल्ली स्थित डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेकनोलॉजी की ओर से तय किया जाता है। उपकरणों व नमूनों की जांच व उनकी रिपोर्ट के आधार पर पीयू की सैफ लैब का कार्य देश भर में अच्छा है।
देश भर से रिसर्च स्कॉलर, शिक्षक, इंडस्ट्री से जुड़े नमूने जांच के लिए यहां पहुंचते हैं। इनकी सालाना संख्या देखें तो 18 से 19 हजार पहुंचती है। इससे लगभग दो करोड़ रुपये सालाना आय होती है। इस रकम से पीयू के जरूरी कार्य होते हैं। साथ ही देश दुनिया में होने वाली नई खोजों के आधार पर तैयार मशीनें यहां लाई जाती हैं। इन मशीनों का रखरखाव भी महंगा होता है। जांच के लिए देश भर से आने वाले नमूनों में रसायन, पानी की मात्रा, तत्वों की संख्या व उनका प्रतिशत इस लैब में पता चलता है।
उसके बाद रिसर्च स्कॉलर अपना रिसर्च आदि आगे बढ़ाते हैं। मालूम हो कि हाल ही में छात्रों ने सैफ लैब में जांच शुल्क कम करने को लेकर दो बार प्रोटेस्ट किया था। उनका कहना है कि पीयू के रिसर्च स्कॉलर के लिए नमूनों की जांच का शुल्क कम किया जाए या फिर माफ किया जाए। इस पर सैफ लैब की ओर से मंथन किया गया, लेकिन इनके हाथ में शुल्क कम करना नहीं है।
सैफ लैब की आय से लाते हैं नई मशीनें
डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेकभनोलॉजी नई दिल्ली की ओर से शुल्क निर्धारित होता है। सैफ लैब से जो भी आय होती है उससे छात्रों के नमूनों के लिए नई मशीनें लाते हैं और मशीनों की मरम्मत होती है। इससे छात्रों को ही लाभ मिलता है।
- प्रो. एसके मेहता, निदेशक, सैफ लैब पीयू