पीयू के दर्शनशास्त्र में एडमिशन मिलना तो आसान नहीं है लेकिन दाखिला मिला तो नौकरी भी पक्की समझो। यहां से शिक्षा पाए पुराने विद्यार्थी आईएएस बनकर निकले हैं। इनके अलावा कोई बैंक में अधिकारी हैं तो कुछ विश्वविद्यालयों में शिक्षक बने हैं। अधिकांश विद्यार्थियों को नौकरी के अवसर यहां से मिले हैं। इस बार भी विभाग ने दाखिले की तैयारी शुरू कर दी है।
दर्शनशास्त्र विभाग का उदय 1962 में हुआ। शुरुआत से ही इस विभाग में दाखिले की दौड़ तेज रही है। सीटों की संख्या से अधिक आवेदन हमेशा ही प्राप्त होते रहे हैं। यहां 44 सीटें हैं। पिछले साल 270 आवेदन विभाग को मिले थे। मेरिट के आधार पर विद्यार्थियों का दाखिला होता है।
विभाग में दाखिले के लिए किसी भी विषय से स्नातक होना जरूरी है। यदि विद्यार्थी के पास स्नातक में दर्शनशास्त्र विषय रहा है तो उसे अतिरिक्त पांच अंक दिए जाते हैं। मई व जून में एडमिशन की प्रक्रिया होती है। यहां से शिक्षा पाने वाले अधिकांश युवा जवाहर लाल विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, पंजाब के कई कॉलेजों में शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं।
विभाग अध्यक्ष डॉ. शिवानी शर्मा ने बताया कि पुराने विद्यार्थी आईएएस बने हैं। दर्शनशास्त्र में नौकरी के अवसर बहुत हैं। यही कारण है कि एडमिशन के लिए आवेदन भी अधिक आते हैं। उन्होंने बताया कि कोग्नेटिव साइंस कोर्स एक शुरू करने जा रहे हैं, जिस बहुत मांग है। इसमें 25 सीटें होंगी।
एकेडमिक काउंसिल जैसे ही इसे मान्यता प्रदान कर देगी, उसी के साथ कोर्स शुरू हो जाएगा। यह कोर्स करने के बाद विद्यार्थी इंडस्ट्री, आर्मी इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर कंपनियां में नौकरी पा सकेंगे। इसके लिए आईआईटी कानपुर से हमारा समझौता हुआ है। इसके अलावा एमए दर्शनशास्त्र करने के बाद विद्यार्थी नेक की परीक्षा पास करके शिक्षक बने रहे हैं। लगातार विभाग प्रगति कर रहा है और नए कोर्स भी हम ला रहे हैं।