काफी देर तक यहां प्रदर्शन चला लेकिन कोई भी अधिकारी उनकी बात सुनने नहीं पहुंचा तो छात्र वीसी आवास की ओर चल दिए। पुलिस ने भी अपना दांव बदल दिया और वीसी आवास के पास जाकर बैरिकेड कर दिया। छात्रों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। वीसी आवास के दूसरे गेट से घुसने की कोशिश की। इसी दौरान डीएसडब्ल्यू प्रो. एसके तोमर व प्रो. सुखबीर कौर पहुंची।
अधिकारियों ने कहा कि कुछ छात्र उनके पास आकर समस्याएं बताएं लेकिन छात्रों ने कहा कि धरनास्थल पर अधिकारी आएं। अधिकारी पहुंचे भी, लेकिन छात्रों ने डीएसडब्ल्यू के साथ नोकझोंक की। छात्रों ने उन्हें कहा कि वह यहां से चले जाएं। उसके बाद अधिकारी चले गए। महिला डीएसडब्ल्यू ने छात्रों से ज्ञापन लिया था, उस ज्ञापन को उन्होंने फेंक दिया। क्योंकि उनका आरोप था कि छात्रों ने उनके साथ सही से बात नहीं की। इस दौरान हंगामा हो जाता लेकिन बाद में एक वार्डन ने जमीन पर पड़े ज्ञापन को उठाया और अधिकारियों को दिया।
मामला लगातार बढ़ता जा रहा था। पुलिस ने अधिकारियों से कहा कि वह आएं छात्रों की बात सुनें। एक पुलिस वाले ने तो यह भी कहा कि क्या अधिकारी पुलिस के कपड़े फड़वाना चाहते हैं। उसके बाद पुलिस ने पीयू के अधिकारियों को तैयार किया और छात्रों के साथ बैठक करवाई। छात्रों ने फीस माफी की मांग की लेकिन पीयू ने कहा कि वह पूरी फीस माफ नहीं कर सकते। छात्र फिर वीसी आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। छात्रों ने कहा कि फीस जमा करने की तिथि पीयू प्रशासन दस दिन बढ़ाए। इस पर पीयू प्रशासन ने आश्वासन दिया तो छात्रों ने धरना खत्म कर दिया।
छात्रों के निशाने पर संघ और भाजपा
छात्रों ने फीस माफी को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था लेकिन इसकी धारा मुड़ गई। संघ और भाजपा को निशाने पर लिया गया। उनके खिलाफ नारेबाजी की गई। डीएसडब्ल्यू छात्रों की बात सुनने आए थे लेकिन उन्हें भी संघी डीएसडब्ल्यू कहा गया। कहा कि डीएसडब्ल्यू बने हैं तो इस पद का आनंद भी उठाएं। कई अन्य बातें भी कहीं गईं। इसको लेकर अधिकारियों ने रोष भी जताया।