पीयू ने अपने दम पर नाम कमाया। आज सीनेट चुनाव पर घमासान चल रहा है। इसे शांत खुद मुद्दा उठाने वाले ही कर सकते हैं। दो सीनेट कार्यकाल से जो सदस्य कार्य कर चुके हैं, उन्हें चुनाव से हट जाना चाहिए। सीनेट जरूरी है। हर देश का संविधान होता है उसी तरह विश्वविद्यालय का भी संविधान होता है।
सीनेट के सदस्यों की संख्या 91 से घटाकर 50 तक लानी होगी : प्रो. मोहम्मद खालिद
पीयू के सीनियर प्रोफेसर एवं पुटा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद खालिद कहते हैं कि पीयू को सीनेट की जरूरत है लेकिन इसमें बदलाव होना बहुत जरूरी है। लगातार इस सीनेट में शामिल होते आ रहे लोगों को अपने आप चुनाव आदि से हटना होगा। दूसरे लोगों को मौका देना होगा। पीयू की बेहतरी यहां के शिक्षक अधिक समझ पाते हैं। ऐसे में शिक्षकों को सीनेट में जगह मिलनी चाहिए।
स्नातक वर्ग से चुनकर आने वाली 15 सीटों की संख्या घटाकर पांच की जानी चाहिए। साथ ही इस वर्ग का नाम स्नातक से बदलकर परास्नातक करना होगा यानी योग्यता बढ़ानी होगी। सीनेट के कुल 91 सदस्यों की संख्या को 50 तक लाना होगा।
डीन का चुनाव सीनेटरों की ओर से नहीं होना चाहिए। डीन वही लोग बनाए जाएं जो उस विभाग के विशेषज्ञ हों। ऐसा नहीं होना चाहिए कि विभाग के बारे में जानकारी नहीं और डीन बन गए। ऐसे में निर्णय गलत होंगे। पीयू को आगे बढ़ाने के लिए सीनेट में विशेषज्ञों को शामिल करना होगा। जितने अधिक जानकार होंगे उतना ही पीयू आगे बढ़ेगी। पीयू में सीनेट चुनाव को लेकर चल रहे घमासान को शांत किया जाना चाहिए।