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पीयू की बेहतरी के लिए सीनेट रिफॉर्म जरूरी, जो आठ साल से सदस्य, वे वापस लें उम्मीदवारी

Wed, 25 Nov 2020 05:18 PM IST
ajay kumar सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • विशेषज्ञ बोले- 1933 में विश्वविद्यालय एक्ट में बदलाव करने की बात कही गई जो आज तक नहीं हो पाई
  • कोलकाता, मुंबई, मद्रास, इलाहाबाद विश्वविद्यालयों का एक्ट भी स्वतंत्रता के बाद बदला गया, पर यहां नहीं
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पंजाब विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट चुनाव पर घमासान बढ़ता जा रहा है। सोमवार को हुए वाकया के बाद सभी हैरत में हैं। इस घमासान को शांत करने के लिए विशेषज्ञों ने दो रास्ते बताए हैं। पहला- पीयू की बेहतरी के लिए सीनेट रिफॉर्म जरूरी और दूसरा आठ साल से जो सदस्य हैं, वह खुद ही चुनाव से हट जाएं। साथ ही उन्होंने पीयू की बेहतरी के लिए सीनेट का होना जरूरी बताया और कहा कि इसमें राजनीति का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इस बदलाव की बात 1933 में ही हो गई थी लेकिन 87 साल बाद भी यह नहीं हुआ। जबकि दूसरे विश्वविद्यालयों ने आजादी के बाद अपने एक्ट में बदलाव किए और आज वह विश्वविद्यालय दौड़ रहे हैं। 

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पीयू को आगे बढ़ता देखना चाहते हैं तो सीनेट रिफॉर्म जरूरी : प्रो. ग्रोवर 
पीयू के पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर कहते हैं कि वर्ष 1933 में पीयू की ओर से एक जांच कमेटी बनाई गई थी। उस कमेटी के सचिव जेएफ ब्रूश थे जो हिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर थे। उन्होंने ‘हिस्ट्री ऑफ यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब’ नामक बुक लिखी और उसके आखिरी के चार पन्नों में पीयू के एक्ट में बदलाव की बात कही। यह बदलाव उस दौरान नहीं हुआ। न ही आजादी के समय हुआ और न 1966 में। जब री-ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पंजाब हुआ। 


हरियाणा व हिमाचल के कॉलेज पीयू से अलग हुए थे जबकि लाहौर में जो विश्वविद्यालय हम छोड़कर आए उसने भी अपने एक्ट में वर्ष 1950 में जरूरी बदलाव किए। मद्रास, कोलकाता, मुंबई, इलाहाबाद आदि विश्वविद्यालयों ने अपने एक्ट में सुधार किए। पीयू ने इस पर काम नहीं किया। कुछ लोग ने अपने निजी हित के लिए बदलाव नहीं होने दिए। 

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पीयू ने अपने दम पर नाम कमाया। आज सीनेट चुनाव पर घमासान चल रहा है। इसे शांत खुद मुद्दा उठाने वाले ही कर सकते हैं। दो सीनेट कार्यकाल से जो सदस्य कार्य कर चुके हैं, उन्हें चुनाव से हट जाना चाहिए। सीनेट जरूरी है। हर देश का संविधान होता है उसी तरह विश्वविद्यालय का भी संविधान होता है।

सीनेट के सदस्यों की संख्या 91 से घटाकर 50 तक लानी होगी : प्रो. मोहम्मद खालिद
पीयू के सीनियर प्रोफेसर एवं पुटा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद खालिद कहते हैं कि पीयू को सीनेट की जरूरत है लेकिन इसमें बदलाव होना बहुत जरूरी है। लगातार इस सीनेट में शामिल होते आ रहे लोगों को अपने आप चुनाव आदि से हटना होगा। दूसरे लोगों को मौका देना होगा। पीयू की बेहतरी यहां के शिक्षक अधिक समझ पाते हैं। ऐसे में शिक्षकों को सीनेट में जगह मिलनी चाहिए।

स्नातक वर्ग से चुनकर आने वाली 15 सीटों की संख्या घटाकर पांच की जानी चाहिए। साथ ही इस वर्ग का नाम स्नातक से बदलकर परास्नातक करना होगा यानी योग्यता बढ़ानी होगी। सीनेट के कुल 91 सदस्यों की संख्या को 50 तक लाना होगा। 

डीन का चुनाव सीनेटरों की ओर से नहीं होना चाहिए। डीन वही लोग बनाए जाएं जो उस विभाग के विशेषज्ञ हों। ऐसा नहीं होना चाहिए कि विभाग के बारे में जानकारी नहीं और डीन बन गए। ऐसे में निर्णय गलत होंगे। पीयू को आगे बढ़ाने के लिए सीनेट में विशेषज्ञों को शामिल करना होगा। जितने अधिक जानकार होंगे उतना ही पीयू आगे बढ़ेगी। पीयू में सीनेट चुनाव को लेकर चल रहे घमासान को शांत किया जाना चाहिए।
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