पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ टीचर्स एसोसिएशन (पूटा) भी पीयू में बदलाव लाने के पक्ष में है, लेकिन इसमें कुछ शर्तें हैं। बदलाव ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे एकाधिकार स्थापित हो जाए। पीयू की गवर्निंग बॉडी को चुनने में बदलाव लाने की जो बहस चल रही है, उसमें पूटा ने भी दस्तक दी है।
पीयू में शुक्रवार को पूटा की जनरल बॉडी मीटिंग हुई और इसमें संस्थान के कई शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान अलग-अलग सुझाव आए, जिन्हें एकत्रित कर एक डिबेट की जाएगी। हालांकि बैठक में किसी ने भी वीसी के खिलाफ कुछ नहीं कहा।
हालांकि ऐसा लग रहा था कि हाईकोर्ट में दिए शपथ पत्र के बाद से पूटा की जनरल बॉडी मीटिंग में इस पर सवाल उठाए जा सकते हैं। पिछले कुछ समय से पीयू की गवर्निंग बॉडी चुनने में बदलाव लाने की प्रक्रिया का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। बदलाव के लिए बाकायदा एक कमेटी भी बनी हुई है। इसी बीच पूटा ने जनरल बॉडी मीटिंग कर शिक्षकों से सुझाव जुटाए।
इस बैठक में पूटा के पूर्व के सभी अध्यक्ष, शिक्षकों ने अपने-अपने सुझाव दिए। मुख्य तौर पर इस बैठक में सामने आया कि बदलाव लाने का पूटा समर्थन करती है। इस प्रक्रिया के लिए जो भी कमेटियां बनाई गई हैं, उनकी रिपोर्ट आने पर उसे सार्वजनिक किया जाए। इसके अलावा एक मुख्य सुझाव आया कि जो भी बदलाव किया जाए, उसे प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर लागू किया जाए।
आखिर क्यों हो रही है बहस
दरअसल पीयू की गवर्निंग बॉडी सीनेट और सिंडिकेट चुनने की प्रक्रिया में बदलाव लाने को लेकर वीसी ने हाईकोर्ट में एक शपथ पत्र दिया था। हालांकि इससे पहले रिफॉर्मिंग कमेटी बनी हुई है, जिसकी अब तक रिपोर्ट नहीं आई। वहीं शपथ पत्र के बाद से पीयू का माहौल ही बदल गया है। इसके चलते पूटा को जनरल बॉडी मीटिंग कर बदलाव के सुझाव जुटाने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। हालांकि पूटा ने पीयू प्रबंधन को ओपन डिबेट के लिए भी कहा है, जिसमें पीयू से संबंधित सभी पक्षों को एक मंच पर लाकर बदलाव पर चर्चा की जाएगी।