Punjab University Professor Arun Kumar Grover
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सिंडीकेट ने प्रोफेसर वीके चोपड़ा रीइंप्लाइमेंट के मामले में कमेटी गठित करने का फैसला लिया है। यह कमेटी वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर की अध्यक्षता में काम करेगी। कमेटी गठन का फैसला रविवार को बुलाई गई स्पेशल सिंडीकेट की बैठक में लिया गया।
यह कमेटी प्रो. चोपड़ा का पुराना रिकॉर्ड भी जांचेगी। बैठक में इस बात पर भी जमकर चर्चा हुई कि सीधे चांसलर को नोटिस भेजने जैसे मामलों में सख्त नियम बनाए जाएं। इसके लिए अलग से कोड ऑफ कंडक्ट बने। ऐसा करने से पहले पीयू प्रशासन अनौपचारिक तौर पर टीचर्स संगठनों से हर पहलू पर चर्चा भी करेगा। मीटिंग से पहले यह भी चर्चा थी कि चांसलर को लीगल नोटिस दिए जाने के मामले में पीयू प्रशासन हाईकोर्ट जाने का रास्ता भी चुन सकता है। लेकिन रविवार की मीटिंग में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई।
पंजाब यूनिवर्सिटी के इवनिंग स्टडीज विभाग के रिटायर्ड प्रोफेसर वीके चोपड़ा ने अपनी रीइंप्लाइमेंट के मामले में सीधे पीयू चांसलर कम देश के उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी को लीगल नोटिस भिजवाया था। पीयू प्रशासन ने इस बात पर खासी नाराजगी व्यक्त की। 2013 में 60 साल पूरे होने पर रिटायरमेंट के बाद पीयू नियमों के तहत प्रो. चोपड़ा को रीइंप्लाइमेंट दी गई थी। प्रो. चोपड़ा ने अपनी दूसरी पारी में पीयू की वित्तीय अनियमितताओं की पोल पट्टी खोलनी शुरू कर दी। प्रो. चोपड़ा ने कुछ समय पहले ही प्रशासन पर आरोप लगाया था कि पीयू के ग्रांट को लेकर हाईकोर्ट में जो केस लंबित है उसमें यूजीसी और एमएचआरडी हॉस्टल घोटाले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। इस घोटाले में पीयू के पूर्व डीएसडब्ल्यू के भाई को गलत तरीके से हॉस्टल के ठेके देने के आरोप लगाए गए थे।