24 घंटे गर्ल्स हॉस्टल खुलवाने की मांग को लेकर चल रहा डे-नाइट प्रोटेस्ट हर दिन अपनी चाल बदल रहा है। प्रोटेस्ट से सामाजिक कार्यकर्ताओं को जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा महिला सशक्तीकरण की बात करने वाले बड़े विचारकों को भी इकट्ठा किए जाने की तैयारी की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि स्टूडेंट काउंसिल अध्यक्ष कनुप्रिया ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, जेएनयू के अध्यक्ष बालाजी आदि को पत्र लिखकर उनसे छात्राओं की आजादी के लिए प्रोटेस्ट का हिस्सा बनने का आग्रह किया है। साथ ही देशभर में इस बाद का संदेश देने को कहा कि छात्राएं अब चारदीवारी में बंद नहीं रहेंगी। छात्राओं को कैद रखने वाले अपनी मानसिकता में बदलाव लाएं।
आजादी के लिए अब चिट्ठी का सहारा
प्रोटेस्ट को आगे बढ़ाने के लिए चिट्ठी वार का सहारा लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि हॉस्टल की सभी छात्राएं इस मांग के लिए राष्ट्रपति, चांसलर, गवर्नर, महिला मंत्रियों, देशभर के बड़े स्टूडेंट्स लीडर, महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं को पत्र लिखे जाएंगे। बताया जाता है कि दो हजार से अधिक चिट्ठियां इन लोगों के पास पहुंचेंगी। खुद वाइस चांसलर को भी डाक के माध्यम से चिट्ठी छात्राएं भेजने की तैयारी कर रही हैं। यही नहीं अभिभावकों के जरिये भी संदेश भिजवाया जाएगा कि वह छात्राओं की आजादी चाहते हैं।
रैंकिंग में आगे बढ़ रहे, सोच बदल नहीं रहे
छात्राओं ने यह भी बात भी कही है कि पंजाब विश्वविद्यालय रैंकिंग में अन्य विश्वविद्यालयों से आगे बढ़ रहा है। कम रैंक पाने वाले विश्वविद्यालयों में छात्राओं को आजादी दी गई लेकिन अच्छे रैंक वाले विश्वविद्यालयों में नहीं जबकि यहां की सोच उन विश्वविद्यालयों से अलग होने के कारण ही पढ़ाई में नाम कमा रहे हैं। जब पीयू अच्छे विश्वविद्यालय की श्रेणी में शामिल है तो छात्राओं को आजादी वैसे ही मिल जानी चाहिए।
अब तो एकजुटता तोड़ना आसान नहीं
पंजाब विश्वविद्यालय में चल रहे प्रोटेस्ट में छात्राओं की तादाद लगातार बढ़ रही है। पांच व सात नंबर हॉस्टल से भी छात्राएं आकर प्रोटेस्ट में शामिल हो रही हैं। रविवार को यह देखने को भी मिला। सोमवार की रात स्टूडेंट्स ने प्रोटेस्ट के जरिये बैठक की। अध्यक्ष कनुप्रिया ने कहा कि अब आंदोलन नया रूप जल्द लेगा। सभी लोग एकजुट रहें। उनकी मांग जायज है। एक दिन उन्हीं की जीत होगी।
कहा कि पीयू प्रशासन से वह डरने वाली नहीं हैं। हसनप्रीत ने कहा कि जरूरत एकता की है। अब छात्राएं और जुड़ने लगी हैं। सभी को धीरे-धीरे पता चल रहा है कि आंदोलन कर रही छात्राएं अपने लिए नहीं बल्कि संपूर्ण नारी जाति के लिए नया रास्ता खोलने की मांग कर रही हैं ताकि भविष्य में उन्हें आजादी के लिए दोबारा न लड़ना पड़े, खुद लोग उनके चलने से रास्ता छोड़ दें।