पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव 2018 में देखना यह होगा कि बागडोर आखिर किसके हाथ में आएगी? समीकरणों पर एक नजर डालिए, खुद ब खुद समझ जाएंगे। दरअसल, चुनाव में जिस पार्टी को 25 फीसदी वोट मिलेगा, उस पार्टी के उम्मीदवार के सिर पर जीत का ताज सजेगा। बीते दस साल के आंकड़े बताते हैं कि जिस छात्र संगठन को 17 से 25 फीसदी वोट मिला, उसने जीत हासिल की। इस बार चुनाव में भी यही स्थिति रहने की उम्मीद है।
ऐसे में सभी छात्र संगठनों ने इस आंकड़े के लिए गठबंधन के बाद मंथन शुरू कर दिया है। पीयू में वर्ष 2018 में 15,350 स्टूडेंट्स के वोट हैं। अध्यक्ष पद के लिए जो भी उम्मीदवार 3500 वोट हासिल कर लेगा, उसकी जीत निश्चित है। इसे लेकर एबीवीपी और एसएफपीयू ने गठबंधन का पैनल उतारा है। इसके अलावा सोई, इनसो, आईएसएस, एचपीएसयू , हिमसू पार्टी गठबंधन कर चुनाव लड़ रही हैं।
वहीं पुसू और एचपीएसयू का गठबंधन मैदान में है। इस बार एनएसयूआई बिना गठबंधन सभी पदों पर अपने कैंडिडेट उतार रही है। एसएफएस की ओर से केवल प्रेसिडेंट पद के लिए एक कैंडीडेंट महिला को उतारा गया है। छह सितंबर से वोटिंग से पहले सभी छात्र संगठनों की ओर से नब्ज टटोली जा रही है। इस बार छात्रसंघ के चुनाव में वोटिंग का प्रतिशत क्या होगा।
यह एक बड़ा सवाल है। हालांकि पीयू के आंकडे़ के मुताबिक पिछले वर्ष 17.84 फीसदी वोट पाने वाले उम्मीदवार ने प्रधान के पद पर जीत दर्ज की थी। वोटिंग में लगातार स्टूडेंट्स का रुझान घटा है। पीयू छात्र संघ चुनाव में हर वर्ष करीब नौ हजार स्टूडेंट्स वोटिंग करते हैं। इसमें जीतने वाले उम्मीदवारों को यह वोट मिला है।
पिछले दस साल के आंकडे़
वर्ष प्रेसिडेंट पद मिले वोट किस प्रतिशत पर जीता
2008 साहिल नंदा 2718 17.31
2009 अमित भाटिया 3276 20.87
2010 गुरविंदर वीर सिंह औलख 3182 20.27
2011 पुष्पिंदर शर्मा 3730 23.76
2012 सतिंदर सिंह सत्ती 3978 25.34
2013 चंदन राणा 3599 22.93
2014 दिव्यांशू बुद्घिराजा 2249 14.32
2015 जसमीन कंग 3731 23.77
2016 निशांत कौशल 2843 18.11
2017 जश्न कंबोज 2801 17.84