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पीयू सीनेट की बैठक में जमकर हंगामा, वीसी का वॉक आउट

Mon, 22 Jan 2018 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Punjab University VC Arun Grover Press conference - फोटो : File Photo
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) सीनेट की साल की पहली बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। सिर्फ एक ही मामले में सुबह से शाम तक बहस, हंगामा और तू-तू, मैं-मैं होती रही। स्थिति यह हो गई कि वीसी को बैठक से वॉक आउट करना पड़ा। बाद में कुछ सदस्य वीसी को मनाकर वापस ले आए और दोबारा बैठक शुरू की गई लेकिन मामला जस का तस रहा और शाम को बैठक स्थगित कर दी गई।     
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रविवार को रखी गई सीनेट की विशेष बैठक में कुल 10 मामलों पर चर्चा और फैसला लिया जाना था। सुबह सवा ग्यारह बजे बैठक शुरू होते ही आखिरी समय में कुछ मामलों को एजेंडे में जोड़ने को लेकर बहस होने लगी। किसी तरह से इस बहस को छोड़कर पहले मामले पर चर्चा शुरू की गई। मामला था पीयू के पंजाब स्थित कुछ कालेजों में रिटायरमेंट के बाद तैनात प्रिंसिपलों को एक्सटेंशन देनी है या नहीं? इस मामले का बहुमत में विरोध हुआ। प्रमोशन का इंतजार कर रहे एसोसिएट प्रोफेसरों को मौका देने की मांग उठी। सुबह से सवा ग्यारह बजे से शाम सवा छह बजे तक यानी सात घंटे इसी मसले पर सुझाव आए, बहस हुई, हंगामा हुआ और यहां तक वीसी का वॉक आउट हुआ लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

देश आगे बढ़ रहा और पीयू पीछे
रिटायरमेंट के बाद रि-इंप्लायमेंट और एक्सटेंशन के मसले पर एक सदस्य ने कहा कि देश आगे बढ़ रहा है। युवाओं को मौका मिल रहा है लेकिन हम पीछे जा रहे हैं। सैकड़ों वरिष्ठ शिक्षक प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं जो प्रिंसिपल बनने के काबिल हैं लेकिन उन्हें मौका नहीं दिया जा रहा। 
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पंजाब में 71 कालेज बगैर प्रिंसिपल के
पीयू से संबंधित पंजाब के 71 कालेज बगैर प्रिंसिपल के चल रहे हैं। यहां कोई देखने वाला नहीं है कि आखिर चल क्या रहा है। मैनेजमेंट अपनी मर्जी से रिटायरमेंट के बाद भी प्रिंसिपलों नियुक्त दे देती है। दलील दी जाती है कि किसी और ने आवेदन नहीं किया। सीनेट सदस्य एचएस दुआ ने कहा कि कालेजों की मैनेजमेंट का शिक्षकों में खौफ है। शिक्षकों को बेइज्जत किया जाता है। कई डर से आवेदन नहीं करते और जो करते हैं उन्हें नॉन सुटेबल करार दे दिया जाता है। 

साढ़े चार बजे जो हंगामा शुरू हुआ तो फिर नहीं थमा

Punjab University VC Arun Grover Press conference - फोटो : File Photo
साढ़े चार बजे जो हंगामा शुरू हुआ तो फिर नहीं थमा
बैठक में दोपहर सवा तीन बजे तक सीनेट के अलग-अलग सदस्यों की तरफ से सुझाव आते रहे। हालांकि एक बड़ा धड़ा एक्सटेंसशन के खिलाफ था। फिर भी बैठक की अध्यक्षता कर रहे पीयू के वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर की तरफ से बैठक को लंच के बाद तक टाल दिया गया। तर्क दिया गया कि लंच के बाद आने तक सभी एक फैसला लेने के लिए मन बना लें। लंच के बाद बैठक शुरू हुई तो एक्सटेंशन के मसले पर फैसला लेने की लिए कहा गया।

ज्यादातर सदस्य इस नीति के खिलाफ थे। बार-बार गुजारिश के बाद भी हाथ खड़े कराकर वोटिंग नहीं कराई गई। साढ़े चार बजे अचानक वीसी ने कहा कि मामला फिर से सिंडिकेट में जाएगा। इसके बाद तो जो जबरदस्त हंगामा शुरू हुआ वह फिर नहीं रुका। कालेजों की तरफ से सीनेट के सदस्यों ने कहा कि जब एक मामला सिंडिकेट से सीनेट में आ गया, उस पर इतनी बार बहस हो चुकी है तो उसे फिर से कैसे सिंडिकेट में भेजा जा सकता है? इसी बीच एक सदस्य ने वीसी पर आरोप लगाया कि वह मनमर्जी कर रहे हैं और एक्सटेंशन का मसला जबरदस्ती पास करवाकर थोपना चाहते हैं।

इसके बाद वीसी भड़क गए और बैठक से वॉक आउट कर गए। उनके साथ रजिस्ट्रार भी चले गए। इस दौरान सदस्य एचएस दुआ की दूसरे सदस्य जरनैल सिंह के साथ जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई। दुआ एक्सटेंशन का शुरू से ही विरोध कर रहे हैं। एक  अन्य ग्रुप में भी बहस छिड़ गई। एक पक्ष कहने लगा कि हम बंधक नहीं है, जिन्हें बुलाया जाए और बैठक के बीच में छोड़ दिया जाए। किसी तरह बहस थमी और कुछ सदस्य वीसी को करीब 10 मिनट बाद सीनेट में वापस लाए।

मैं कुछ नहीं थोपता, सब पुराने मसले हैं : वीसी
वॉक आउट के बाद सीनेट में वापस आए वीसी ने कहा कि वे अपना कोई फैसला नहीं थोपते। यह सब मसले पुराने हैं और कालेज प्रिंसिपलों को एक्सटेंशन का मसला भी उनमें से एक है। कुछ सीनेट सदस्यों की तरफ से कहा गया कि पंजाब और चंडीगढ़ के उन अधिकारियों को भी सीनेट में आना चाहिए जो मनोनित हैं क्योंकि अगर अधिकारी आएंगे, समस्याएं जानेंगे तो जल्दी हल निकलेगा। इस पर वीसी ने कहा कि वे बुलाकर थक गए हैं, कोई नहीं आता तो क्या कर सकता हूं?
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एक बहस को छोड़कर दूसरी शुरू हुई, नतीजा किसी पर नहीं

VC Arun Grover On PU - फोटो : File Photo
एक बहस को छोड़कर दूसरी शुरू हुई, नतीजा किसी पर नहीं
शाम 5.50 बजे अचानक दूसरी बहस शुरू कर दी गई। एक सदस्य ने कहा कि पंजाब के एजूकेशन कालेज में कई दिक्कतें हैं। शिक्षकों को तनख्वाह नहीं मिलती, कभी भी निकाल दिया जाता है। पंजाब के टांडा में एक कालेज में शिक्षकों की बुरी हालत हो रही है। उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया जाता है।

इस मसले को अभी समझाया ही जा रहा था कि कुछ सदस्य शोर मचाने लगे कि पहले वह मसला पूरा किया जाए, जिस पर पहले बहस चल रही थी। आखिर सवा छह बजे वीसी ने सीनेट बैठक स्थगित कर दी कि आज जो भी हुआ उस पर सिंडिकेट में चर्चा होगी। इस तरह सात घंटे की सीनेट किसी भी मसले पर फैसला लिए बगैर स्थगित हो गई।

रजिस्ट्रार के बर्ताव को बताया गलत
सीनेट बैठक की शुरुआत में एक सीनेटर ने कहा कि रजिस्ट्रार का बर्ताव अच्छा नहीं है। वह हर मसले में दखल देते हैं। चाहे किसी की एलटीसी हो या रिसर्च का मसला। इतना ही नहीं, उनके दफ्तर में कोई जाए तो उसे भी लताड़ देते हैं कि बगैर इजाजत मिलने कैसे आए? पिछले दिनों टीचर एसोसिएशन प्रधान ने भी यह मसला उठाया था और रविवार को सीनेट शुरू होने से पहले रजिस्ट्रार के बर्ताव पर विरोध जताया। हालांकि जब सीनेट में यह बात रखी गई तो रजिस्ट्रार ने कोई जवाब नहीं दिया। वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने ही सीनेटर को यह कहकर बैठा दिया कि यह मसला इस बैठक के एजेंडे में नहीं है।
 
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