पंजाब यूनिवर्सिटी(पीयू) प्रशासन ने दिसंबर में ठेके पर भर्ती किए गए 200 से अधिक कर्मचारियों की छुट्टी कर दी है। इतना ही नहीं इन कर्मचारियों को हटाने का भी कारण नहीं बताया है। हद तो तब हो गई जब एक महीने तक काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन तक जारी नहीं किया गया। जानकारी अनुसार पूरे मामले में पंजाब यूनिवर्सिटी का कार्यप्रणाली पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
जानकारी के अनुसार पीयू प्रशासन ने दिंसबर 2016 में किसी एजेंसी के माध्यम से 200 से अधिक हेल्पर और अन्य कर्मचारियों को रखा था। इन कर्मचारियों को पेपर चेकिंग से जुड़ी ब्रांच और कुछ को अन्य ब्रांच में लगाया गया था। दिसंबर में सभी कर्मचारियों से पूरा काम करवाया गया, लेकिन जनवरी में सभी को हटाने के आदेश जारी कर दिए गए। कर्मचारियों को यह भी नहीं बताया गया कि उन्हें क्यों हटाया गया है।
सूत्रों के अनुसार रजिस्ट्रार ऑफिस के निर्देश कर्मचारियों की नियुक्ति तो कर ली गई, लेकिन इस मामले में ऑडिट विभाग से अनुमति नहीं ली गई। मामले में ऑडिट ब्रांच से ऑब्जेक्शन आने के बाद आनन फानन में सभी कर्मचारियों को तुरंत हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए। जानकारी अनुसार ठेके पर कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली एक कंपनी को अधिकारियों ने बिना अनुमति लिए काम दे दिया।
जिसका बाद में ऑडिट ऑब्जेक्शन लगने से मामला बिगड़ गया। उधर मामले में पीयू फाइनेंस एंड डेवलेपमेंट ऑफिशर बिक्रम नैयर का कहना है कि उन्हें ठेके पर कर्मचारियों की नियुक्ति पर ऑडिट ऑब्जेक्शन के मामले में जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण पीयू प्रशासन कर्मचारियों की छटनी कर रहा है। नैयर के अनुसार सिर्फ जरुरत के हिसाब से ही कर्मचारियों को रखा जाएगा।