पंजाब यूनिवर्सिटी की एनआरआइएफ रैंकिंग अन्य यूनिवर्सिटियों खासकर जेएनयू की तुलना लगातार गिरती आ रही है। इसकी मुख्य वजह यहां डेंटल एव इंजीनियरिंग में पीएचडी न होना है। इसकी चिंता कैंपस के इंटरनल क्वालिटी इश्योरेंस सेल (आइक्यूएसी) सेल की ओर से वाइस चांसलर को पत्र लिख जताई गई है। सेल ने इसका समाधान निकालने के लिए इन दोनों विभाग में पीएचडी करवाने के लिए सलाह दी है। साथ ही सभी विभागों के चेयरपर्सन को अपने अपने आइआरबी पोर्टल को जल्द से जल्द अपेडट करने को लेकर सुझाव दिया गया है, जिसमें फेकेल्टी की सारी जानकारियां उपलब्ध करवानी होंगी। सेल की ओर से वीसी प्रो. राजकुमार को सेल की समस्याओं के बारे में भी बताया गया है। सेल ने 2017-2018 के अपने रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया है।
जेएनयू और पीयू के फैकल्टी के अंतर को किया गया है केंद्रित
इस पत्र में आइक्यूएसी सेल की ओर से जेएनयू और पीयू के फैकल्टी के बीच अंतरों को भी केंद्रित किया गया है। जानकारी दी गई है कि जहां जेएनयू में सबसे युवा फैकल्टी सदस्य की उम्र 24 और सबसे अधिक उम्र दराज फैकल्टी 73 है, वहीं पीयू में सबसे युवा फैकल्टी सदस्य की 26 और उम्रदराज की 75 है। वहीं जेएनयू फैकल्टी का औसतन अनुभव 17.76 सालों का है जबकि पीयू फैकल्टी का औसतन अनुभव 16.41 साल से भी कम है।
957 फैकल्टी में से मात्र 688 पीएचडी डिग्री होल्डर
पंजाब यूनिवर्सिटी के टीचिंग फैकल्टी में पीएचडीधारकों की संख्या कम होने के कारण भी रैंकिग पर असर पड़ रहा है। वर्तमान समय में कैंपस में कुल 957 टीचिंग फैकल्टी सदस्य हैं। इनमें 488 महिला और 469 पुरुष सदस्य हैं। इसमें से मात्र 688 ही पीएचडी डिग्री होल्डर हैं, वहीं 269 फैकल्टी बिना पीएचडी डिग्री के ही हैं। गौरतलब है कि कुल पीएचडी का 57.4 प्रतिशत पीएचडी फैकल्टी होल्डर यूआईईटी से हैं। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूसरे विभागों में पीएचडी टीचिंग फैकल्टी होल्डर की क्या स्थिति है।