घाटा और अग्निकांड जैसे विवादों से जूझ रही पंजाब यूनिवर्सिटी क्वाकवैरेली साइमंड्स (क्यूएस) रैंकिंग में भारत की यूनिवर्सिटीज में 12 नंबर से खिसककर 18 रैंक पर आ गई है। वहीं अगर विश्व स्तर की यूनिवर्सिटीज की बात करें तो पीयू को 800 से 1000 रैंक के बीच में रखा गया है। क्यूएस एक अर्से से विश्व भर की यूनिवर्सिटीज के लिए रैंक देती है। इसके लिए बाकायदा सभी सुविधाओं, स्टडी और रिसर्च को शामिल किया जाता है।
वहीं पीयू के वीसी प्रोफेसर अरुण ग्रोवर ने संतोष जताते हुए कहा कि इतनी दिक्कतों में होने के बाद भी संस्थान ने रैंक बनाए रखा है। वहीं पीयू प्रबंधन का कहना है कि नॉन सेंट्रल यूनिवर्सिटी कैटेगरी में पीयू को 18 रैंक मिला है, जो मुंबई यूनिवर्सिटी के 19 और जेएनयू दिल्ली के 21 रैंक से बेहतर है।
इन पहलुओं पर रहता है रैंकिंग का आधार
- एंप्लोयर- 10 प्रतिशत
- एकेडमिक रेपुटेशन- 40 प्रतिशत
- रिसर्च- 20 प्रतिशत
- इंटरनेशनल फैकल्टी - 5 प्रतिशत
- इंटरनेशनल स्टूडेंट- 5 प्रतिशत
एमएचआरडी रेंकिंग में भी खिसक गई थी पीयू
एमएचआरडी की तरफ से इसी साल अप्रैल में जारी रैंकिंग में भी पीयू 12 से 33वें रैंक पर फिसल गई थी। इस रैंकिंग में पीयू के पिछड़ने का कारण रिसर्च न होना और शिक्षा में सुधार के लिए नए प्रोफेसर न भर्ती करना रहा था।