पंजाब विश्वविद्यालय तीन साल से मैनपावर ऑडिट नहीं करवा रहा है और अगर यह हुआ तो 55 से ज्यादा शिक्षकों के पद खत्म हो जाएंगे। ऑडिट न करवाने का कारण यह माना जा रहा है कि जैसे ही ऑडिट हुआ तो पीयू के विभागों व कार्यालय में दो साल से खाली चल रहे पद स्वत: खत्म हो जाएंगे। बताया जाता है कि पीयू के 55 से अधिक शिक्षकों के पद कई साल से खाली चल रहे हैं। यह नियमों के मुताबिक समाप्त हो जाएंगे।
यूजीसी ने पिछले वर्षों में आदेश जारी किए थे कि हर साल मैनपावर ऑडिट होना चाहिए, ताकि विभागों में खाली पड़े पदों के मुताबिक रिक्तियां हो सकें और यदि जिस पद की जरूरत नहीं है तो उसे खत्म कर दूसरे विभाग में पद स्वीकृत किया जा सके। यूजीसी ने यह कहा है कि यदि किसी विभाग या कार्यालय में कोई शिक्षक का पद हो या फिर कर्मचारी का पद यदि दो साल से खाली पड़ा है तो वह मैनपावर ऑडिट के आंकड़ों के जरिये स्वत: ही खत्म हो जाएगा और जिस विभाग में जरूरत है उसे वह पद स्वीकृत कर दिया जाएगा।
स्टूडेंट फैकल्टी रेश्यो होना था ठीक
यूजीसी ने यह नियम इसलिए शुरू किया था कि स्टूडेंट फैकल्टी रेश्यो काफी कम है। इसकी पूर्ति केलिए मैनपावर ऑडिट जरूरी है। सूत्रों का कहना है कि पीयू में भी इसके लिए कमेटी बनाई गई लेकिन वह काम नहीं कर पा रही है। विज्ञान वर्ग के कई विभाग ऐसे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में पद खत्म हो जाएंगे। उन्हें बचाने के लिए मैनपावर ऑडिट नहीं करवाया जा रहा है। कर्मचारियों के भी पद कई खाली हैं। यह भी कहा जा रहा है कि कुछ विभाग खाली पदों पर गेस्ट फैकल्टी रखे हैं, ऐसे में उनका काम चल रहा है और उस पद को भरा हुआ दिखाया जा रहा है जबकि रैंकिंग के दौरान स्टूडेंट फैकल्टी रेश्यो परमानेंट शिक्षकों का देखा जाता है।
फिर रैंकिंग गिरने के आसार
पीयू की रैंकिंग हर साल गिर रही है। उसका कारण यही है कि मानकों पर काम नहीं किया जा रहा है। मैनपावर ऑडिट अब तक नहीं किया गया। इसके चलते स्टूडेंट फैकल्टी रेश्यो पूरा नहीं हो पा रहा है। इसी बिंदु पर पीयू को सबसे कम अंक मिलते हैं। परसेप्शन भी पीयू का यहां ठीक नहीं है। इस बिंदु पर भी अंक कम मिल रहे हैं।