पंजाब यूनिवर्सिटी रिसर्च व इनोवेशन को बढ़ाने के लिए दावे बड़े-बड़े करती है, लेकिन इन्हें प्रमोट करने के लिए 15 साल पहले शुरू किए गए कार्यक्रम को लेकर पीयू गंभीर नहीं है। यही कारण है कि चंडीगढ़ साइंस कांग्रेस के लिए दिसंबर में जारी होने वाला नोटिफिकेशन अब तक जारी नहीं हुआ। शिक्षक व रिसर्च स्कॉलर इसके इंतजार में हैं। जानकारों का कहना है कि पीयू किसी अन्य कार्य में लगा हुआ है जबकि पुराने कार्य को आगे बढ़ाना चाहिए था। पीयू के पूर्व वीसी प्रो. आरसी सोबती ने रिसर्च व इनोवेशन को शुरू करने के लिए एक मंच तैयार किया था।
इसका नाम चंडीगढ़ साइंस कांग्रेस रखा गया। तय हुआ कि हर माह दिसंबर में इस कार्यक्रम के लिए नोटिफिकेशन जारी होगा और उसके बाद जनवरी व फरवरी में समय के मुताबिक इसका आयोजन होगा। इसका मुख्य उद्देश्य रिसर्च व इनोवेशन को बढ़ावा देना था। साथ ही रिसर्च स्कॉलर, दूसरे संस्थानों के विद्यार्थियों को अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत करने का भी मौका मिलता था। इसके अंक भी बाकायदा विद्यार्थियों को मिलते हैं जो उनकी नौकरी व प्रमोशन में काम आते हैं। बाहर से बुलाए जाने वाले विशेषज्ञों के जरिये लोगों को ज्ञान बांटा जाता है।
तीन दिन चलने वाले इस कार्यक्रम के जरिये पीयू को काफी जानकारी मिलती है। 15 साल से यह कार्यक्रम तेजी से दौड़ रहा है और पीयू के रिसर्च को भी इसके जरिये काफी मजबूती मिली। इस कार्यक्रम को पीयू को आगे बढ़ाते हुए समय से इसका नोटिफिकेशन दिसंबर में जारी करना था। साथ ही चंडीगढ़ व आसपास के इंस्टीट्यूट को निमंत्रण भेजना था, लेकिन अब तक यह कार्यक्रम नहीं हो पाया। रिसर्च स्कॉलर से लेकर संस्थान तक इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी ले रहे हैं, लेकिन उनकी जिज्ञासा शांत नहीं हो रही है।
कुछ संस्थानों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि वह पीयू को चिट्ठी लिख रहे हैं कि इस कार्यक्रम में देरी क्यों की जा रही है? कई अन्य सवाल भी उठाए हैं जो पीयू को चिट्ठी आने के बाद देने होंगे। कुछ शिक्षक भी कहते हैं कि यह कार्यक्रम हर साल समय पर होता था, लेकिन इस बार समय पर होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।