पंजाब यूनिवर्सिटी ने कागज की बर्बादी रोकने के लिए नया कदम उठाया है। अब अधिकारियों व कर्मचारियों को यात्रा भत्ते के लिए बार बार आवेदन नहीं करना होगा। इसके अलावा एक बार आवेदन होने के बाद प्रमोशन के दौरान ही फार्म भरना होगा। इस पहल से कर्मचारियों को राहत तो मिली ही है, साथ ही उनके समय की भी बचत हुई है पीयू डिप्टी रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार के अलावा कर्मचारियों को यात्रा भत्ता देती है। किसी को 500 तो किसी को 1500 रुपये मिलते हैं।
हर माह इसके लिए सभी को आवेदन करना पड़ता है। इसके लिए कर्मचारियों को समय भी निकालना पड़ता है और हजारों की संख्या में कागज के पेज भी लगते हैं। इसका खर्च भी पीयू के खजाने पर पड़ता है। इस पर पीयू ने गहन मंथन किया। पीयू पहले ही कागज की बर्बादी रोकने के लिए मंथन कर चुका है। हालांकि वह प्लान पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाया, लेकिन यात्रा भत्ते के नाम पर भरने वाले आवेदन अब बार बार नहीं करने होंगे।
जब किसी का प्रमोशन होता है तभी आवेदन की जरूरत महसूस होगी। उससे पहले नहीं। सूत्रों का कहना है कि इसका लाभ हजारों लोगों को मिला है। यह प्रक्रिया फरवरी माह से लागू कर दी गई है। पीयू का कहना है कि जब यात्रा भत्ता हर माह देना ही है तो फिर कागज की बर्बादी क्यों की जाए। साथ ही इस पर पैसे भी खर्च होते हैं, जो बचेंगे। वीसी प्रो. राजकुमार ने यह आदेश सभी विभाग अध्यक्षों, कार्यालयों के अधीक्षकों आदि को दिए हैं।