पंजाब यूनिवर्सिटी को यदि ग्रांट नहीं मिली तो अगले माह शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन देने में यूनिवर्सिटी सक्षम नहीं है। यह जानकारी यूनिवर्सिटी ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से लिए गए स्वयं संज्ञान पर सुनवाई के दौरान दी।
इस जवाब पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि पीयू से सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है। साथ ही पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर क्यों पीयू की दुर्दशा की जा रही है। वहीं हाईकोर्ट ने मामले में यूजीसी को आदेश जारी किया है। कहा है कि यूजीसी ग्रांट जारी कर 21 नवंबर तक कोर्ट को सूचित करे।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अपना बचाव करते हुए कहा गया कि मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय से नहीं, बल्कि पीयू को यूजीसी से ग्रांट मिलती है। 90 करोड़ रुपये की ग्रांट यूजीसी जारी की जा चुकी है और बाकी के 80 करोड़ की ग्रांट के लिए 15 नवंबर की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। हाईकोर्ट ने इस पर स्पष्ट कर दिया कि ग्रांट जारी करने में देरी बर्दाश्त नहीं होगी। अगली सुनवाई पर सरकार को बैठक में लिए गए निर्णय केबारे में कोर्ट को सूचित करना होगा।
आमदनी से ज्यादा खर्चा
VC Arun Grover On PU
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ग्रांट क्यों नहीं बढ़ती : हाईकोर्ट
पीयू की दुर्दशा पर दुख व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हर वर्ष पीयू में छात्रों और पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन पीयू को मिलने वाली ग्रांट राशि नहीं बढ़ रही है। पंजाब सरकार ने जहां पीयू को दी जाने वाली 20 करोड़ की राशि को जस का तस रखा है, वहीं केंद्र सरकार भी 176 करोड़ की ग्रांट को नहीं बढ़ा रही है, जो असल में चिंताजनक स्थिति है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है जब पीयू को दी जाने वाली ग्रांट पर पुन: विचार करते हुए ग्रांट की राशि को बढ़ाया जाए। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के दौरान केंद्र और पंजाब सरकार को ग्रांट की राशि बढ़ाने पर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
आमदनी से ज्यादा खर्चा
पीयू की ओर से बताया गया कि 2014-15 में पीयू को आमदनी कम होने केचलते 212 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इसके बाद पंजाब ने 20 और केंद्र ने 176 करोड़ की ग्रांट दी जिससे घाटा 16 करोड़ रह गया। साल 2016-17 में भी स्थित जस की तस रही और इस बार घाटा 56.60 करोड़ रुपये हुआ। लगातार बढ़ता घाटा देखते हुए पीयू ने ग्रांट को बढ़ाकर 277 करोड़ 72 लाख करने का प्रस्ताव भेजा था, पंरतु अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। बता दें की हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी की बदहाल वित्तीय स्थिति को लेकर हाल ही में समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार पर संज्ञान लेते हुए पीयू को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया था। इसके बाद पंजाब सरकार, केंद्र सरकार सहित अन्य को प्रतिवादि बनाया गया था।