पंजाब यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खुशखबरी है। खासकर नौकरीपेशा लोगों के लिए। पीयू से पीएचडी करने के इच्छुक नौकरी पेशा वाले लोगों को अब कोर्स वर्क में कुछ छूट मिल सकती है।
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दूसरे राज्यों के रिसर्च स्टूडेंट्स को अब पीएचडी कोर्स वर्क के लिए छ महीने पंजाब यूनिवर्सिटी में नहीं रहना पड़ेगा। पीएचडी कोर्स वर्क के लिए उनके राज्य में स्थित यूनिवर्सिटी या कॉलेजों में पीएचडी कोर्स वर्क करने की अनुमति मिल सकती है।
इस संबंध में रविवार को पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट बैठक में प्रस्ताव रखा गया। पीयू कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवन ने इस मामले में कमेटी गठित कर स्टूडेंट्स के हित में फैसला लेने के निर्देश जारी किए हैं।
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6 महीने का वर्क कोर्स होता है
दाखिला
- फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि यूजीसी नियमों की तरह अब पीएचडी कोर्स में रजिस्ट्रेशन से पहले छ: महीने का कोर्स वर्क करना होता है। स्टूडेंट्स को संबंधित विभाग में प्रतिदिन रिसर्च मैथडालॉजी विषय से संबंधित चार विषयों के लिए क्लास लगानी होती है।
छ: महीने के कोर्स वर्क के बाद स्टूडेंट को लिखित परीक्षा पास करनी होती है, परीक्षा पास होने के बाद ही स्टूडेंट का पीएचडी में इनरोलमेंट होता है। नौकरी पेशा वाले लोगों को कोर्स वर्क के लिए अपना शहर छोड़कर आना मुश्किल होता है।
ऐसे में अब पीएचडी करने के इच्छुक स्टूडेंट्स को उनके शहर की ही यूनिवर्सिटी और कॉलेज में रिसर्च कोर्स की अनुमति मिल सकेगी। स्टूडेंट को संबंधित यूनिवर्सिटी या कॉलेज से पंजाब यूनिवर्सिटी को कोर्स वर्क का सर्टिफिकेट जमा करना होगा।
अपने शहर में ही कर सकेंगे कोर्स वर्क
ऊना कॉलेज में भी एडमिशन के लिए छात्र पहुंच रहे हैं। यहां सभी छात्र संगठन मार्गदर्शक केंद्र लगाकर छात्रों की मदद कर रहे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
रविवार को पीयू सीनेट में जीसीजी-42 में प्रोफेसर डॉ. दलीप कुमार ने बताया कि पीएचडी करने के इच्छुक कई अधिकारी और स्टूडेंट कोर्स वर्क की बाध्यता के कारण पीएचडी नहीं कर पाते है। इस मामले में कोर्स वर्क को लेकर कुछ छूट देने का प्रस्ताव रखा गया। जिससे स्टूडेंट अपने शहर में ही कोर्स वर्क कर सकें।
पीयू कुलपति प्रो. अरुण ग्रोवर ने भी मामले में सहमति दिखाई है, लेकिन अभी अंतिम फैसला पीयू की रिसर्च कमेटी की रिपोर्ट के बाद लिया जाएगा। डॉ. दलीप ने बताया कि कई फौजी अधिकारी और आईएएस अधिकारी कोर्स वर्क की बाध्यता के कारण पीयू से पीएचडी नहीं कर पाते हैं।
उधर पीयू सीनेट में यूजीसी द्वारा कॉलेज प्रोफेसर को भी रिसर्च गाइड बनने की अनुमति का मामला उठा। पीयू कुलपति ने आश्वासन दिया है कि जिन कॉलेजों में रिसर्च सेंटर स्थापित होंगे वहां पर शिक्षकों को पीयू गाइड बनने की अनुमति देगा। कॉलेजों में भी कोर्स वर्क शुरू करने की प्रक्रिया जल्द शुरू कर दी जाएगी।
पीयू के 60 से अधिक विभागों से हर साल करीब 300 रिसर्च स्कॉलर पीएचडी की डिग्री हासिल करते हैं। पीयू प्रशासन हर साल पीएचडी और एमफिल कोर्स में दाखिले के लिए एंट्रेंस टेस्ट लेता है। लेकिन विभागों में खाली सीटों की जानकारी नहीं देता।
सीटों की जानकारी नहीं होने के कारण एंट्रेंस टेस्ट क्लीयर करने पर भी काफी स्टूडेंट्स को दाखिला नहीं मिल पाता। पीयू स्टूडेंट काउंसिल प्रधान निशांत कौशल का कहना है कि पीयू सीटों की जानकारी नहीं देकर एंट्रेंस फीस से लाखों की कमाई करता है। उन्होंने कहा कि अगले सत्र से पीयू के सभी विभागों की वेबसाइट पर पीएचडी की खाली सीटों की जानकारी दी जाएगी।
कोर्स वर्क की बाध्यता के कारण दूसरे शहरों में रहने वाले कई कामकाजी लोग पीएचडी नहीं कर पाते। कोर्स वर्क को अन्य यूनिवर्सिटी या कॉलेज से करने की अनुमति के बाद काफी लोगों को लाभ मिलेगा।
- प्रो. दलीप कुमार, सीनेटर पंजाब यूनिवर्सिट