पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ की वेबसाइट कई दिन से फेल चल रही है। इस वजह से फीस जमा करने के लिए स्टूडेंट को चालान नहीं मिल पा रहे हैं। सोमवार को भी ऐसा ही हुआ। चालान के अभाव में सैकड़ों छात्र फीस जमा नहीं कर सके। कुछ स्टूडेंट्स ने लेट फीस अधिक न लगे, इसके कारण बिना चालान के ही फीस बैंक और पोस्ट ऑफिस में जमा कर दी, लेकिन मिली रसीद से वह साबित नहीं कर पाएंगे कि उन्होंने फीस भर दी है। उसका भी एक कारण है कि फीस स्लिप में केवल छात्र का नाम दर्ज है। कक्षा या अन्य बातों का उल्लेख नहीं है। पीयू ने एग्जामिनेशन फीस जमा करने के लिए 8 अक्तूबर तक का दिन तय किया था।
स्टूडेंट्स के विरोध के बाद तिथि बढ़ाकर 15 अक्तूबर कर दी गई थी। स्टूडेंट्स दो हजार रुपये लेट फीस के साथ 22 अक्तूबर तक जमा कर सकते हैं। इसके बाद फीस जमा करने पर लेट फीस 6000 रुपये लगेगी। सोमवार को स्टूडेंट्स ने फीस जमा करने के लिए वेबसाइट खोली, लेकिन चालान का ऑप्शन ही क्लिक नहीं हुआ। इससे छात्र काफी परेशान हो गए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भी बताया, लेकिन समस्या हल नहीं हुई। कुछ विद्यार्थियों ने बिना चालान के ही लेट फीस जमा कर दी। वह इसलिए कि 23 अक्तूबर से लेट फीस दो हजार रुपये से बढ़कर छह हजार हो जाएगी।
चालान के लिए दिनभर लगाते रहे दौड़
बीए थर्ड ईयर के स्टूडेंट दीपक पाल, रविंद्र सिंह, यादराम, सतवीर आदि ने बिना चालान के फीस जमा की। इनका कहना है कि वेबसाइट से चालान नहीं निकला। कई जगह दौड़ लगाई। मंगलवार से छह हजार रुपये लेट फीस लग जाएगी, इसके कारण उन्हें जमा करना पड़ा। वह कहते हैं कि उनके पास केवल नाम की रसीद है। कक्षा नहीं लिखी है। उस नाम के विश्वविद्यालय में कई स्टूडेंट हैं। ऐसे में वह कैसे साबित कर पाएंगे कि उन्होंने ही फीस जमा की है। एमए फिलोस्पी स्टूडेंट कमलजीत कहते हैं उन्होंने भी बिना चालान के लेट फीस जमा की। वेबसाइट से चालान नहीं निकले। बीए के छात्र अमरिंदर सिंह और विक्रम सिंह ने कहा कि चालान न निकल पाने के कारण फीस जमा नहीं कर पाए। वहीं, आइसा अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि छात्रों की समस्या लगातार बढ़ रही हैं। मंगलवार को इसको लेकर कंट्रोलर को ज्ञापन दिया जाएगा।
स्टूडेंट्स ने लगाए ये आरोप...
विद्यार्थियों का कहना है कि इस बार पीयू में सीटें खाली रह गईं। इस कारण जो स्टूडेंट पढ़ रहे हैं उन्हीं से पूरी फीस पीयू प्रशासन वसूलना चाहता है। इसलिए लेट फीस दो हजार से बढ़ाकर छह हजार कर दी गई। यही लेट फीस की रकम प्राइवेट इंस्टीट्यूशंस को लाभ देती है। वह अपने संस्थान में लेट फीस की दर तय करते हैं तो पीयू का उदाहरण देते हैं। इस वजह से प्राइवेट इंस्टीट्यूट के विद्यार्थी भी विरोध नहीं कर पाते।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। स्टूडेंट्स को दिक्कत आ रही है तो वह शिकायत करें। समस्या का समाधान किया जाएगा।
- परविंदर सिंह, कंट्रोलर, पीयू