पंजाब यूनिवर्सिटी की साख अंतरराष्ट्रीय जगत में गिर रही है। यही कारण है कि विदेश से जारी हो रही क्यूएस व एनटीयू रैंकिंग में पीयू पिछड़ रहा है। इसका प्रमुख कारण विशेषज्ञ मानते हैं कि पीयू पैसों के पीछे दौड़ रहा है। कोर्स पर कोर्स शुरू किए जा रहे हैं जबकि फैकल्टी की तैनाती नहीं की जा रही है। नए स्टूडेंट्स के आने से शिक्षकों का अनुपात कम हो रहा है। हैरत की बात यह है कि पीयू को भी इसका अंदाजा है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अगर कोर्स शुरू किए जाने हैं तो पीयू को फैकल्टी की अलग से व्यवस्था करनी चाहिए। पहले से ही शिक्षकों पर भार है। एक एक प्रोफेसर को 18 से 25 घंटे तक सप्ताह में कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं। यही नहीं अधिकांश विभागों के चेयरमैन शिक्षकों की कमी के चलते विभाग के प्रशासनिक कार्य पूरे नहीं कर पा रहे हैं। वह स्टूडेंट्स की कक्षाएं ले रहे हैं। उन पर अधिक भार है। कारण है कि उन्हें रिजल्ट भी बेहतर देने हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो पीयू हर साल 10 से 12 नए कोर्स शुरू करता है। हर साल 300 से अधिक स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ रही है।
इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए आठ से दस शिक्षक चाहिए, लेकिन तैनात नहीं किए जाते। यानी हर साल दस शिक्षकों का काम बढ़ रहा है। हैरत तो ये भी है कि जो नए कोर्स शुरू किए जाते हैं उनमें छात्र भी अधिक नहीं आ पाते हैं और शिक्षा गुणवत्ता और प्रभावित हो जाती है। जानकारों का कहना है कि पीयू कुछ आंकड़ों को बेहतर बताकर पीठ थपथपा रहा है, लेकिन रैंकिंग में वह नीचे आ रहा है। इस पर पीयू के विशेषज्ञों को सोचना होगा अन्यथा जो साख बची है वह भी नहीं रहेगी। फाइनेंशियल क्रंच को अन्य माध्यम से दूर किया जाए या फिर नए कोर्स शुरू हों तो फैकल्टी नई रखी जाए। उन्हीं शिक्षकों पर भार न बढ़ाया जाए।
इन कोर्स में तो स्टूडेंट्स ही नहीं मिल रहे
पीयू के एमपीएड, एमई इलेक्ट्रॉनिक, एमई बायो टेकभनोलॉजी, पंजाबी डिप्लोमा, एमपीएड, एमटेक, डिप्लोमा इन जर्मन समेत 40 से अधिक कोर्स को स्टूडेंट्स ही नहीं मिल रहे हैं। कहीं पांच तो कहीं दस स्टूडेंट्स ने ही आवेदन किए हैं। बाकी सीटें खाली हैं। हालांकि अब इन्हें भरने के लिए ऑफलाइन भी आवेदन लेने की तैयारी पीयू कर रहा है।
यूजीसी से मिली अनुमति, जल्द होगा काम
जिन विभागों ने नए कोर्स शुरू करने का आग्रह किया था वहीं पर कोर्स शुरू किए गए हैं, उन विभागों के पास फैकल्टी पहले से ही रहती है। नए कोर्स भी ज्यादा शुरू नहीं किए जाते। फैकल्टी तैनाती की अनुमति अब यूजीसी से मिल गई है जल्द ही इस पर काम होगा।
- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी