पंजाब यूनिवर्सिटी की नई सिंडिकेट की पहली बैठक में सोमवार को माहौल गर्म रहा। डीन रिसर्च का पद तीन माह से खाली रहने पर सदस्यों ने सवाल उठाए। इस पर काफी बहस हुई। इसके बाद प्रो. आरके सिंगला के नाम पर मुहर लगा दी गई। इसी दौरान डिग्री कॉलेज प्राचार्यों के एक्सटेंशन का भी कुछ सदस्यों ने विरोध किया, लेकिन एक प्राचार्य के कार्यकाल को विस्तार दे दिया गया। साथ ही बोर्ड ऑफ फाइनेंस के लिए अशोक गोयल, डॉ. नवदीप गोयल व प्रो. केशव मल्होत्रा के नामों पर मुहर लगाई गई। सिंडिकेट की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई तो पिछली बैठकों के मिनट्स पास करवाए गए। उसके बाद मुद्दा डीन रिसर्च के पद को लेकर उठाया गया।
सदस्यों ने वीसी प्रो. राजकुमार से कहा कि कई माह से यह पद खाली चल रहा है जबकि पिछली बैठक में तय हो गया था कि सीनियर शिक्षक को इस पद पर तैनात किया जाएगा, बावजूद इसके कोई निर्णय नहीं लिया गया। वीसी ने कहा कि इसके लिए कमेटी बनाई गई है। रिपोर्ट आने के बाद जल्द ही निर्णय होगा लेकिन सदस्य नहीं मानें। घंटों बहस चलती रही। मामला आगे बढ़ा तो दोपहर हो गई और उसी समय लंच के लिए सदस्यों को भेज दिया गया। जैसे ही सदस्य लंच करके लौटे तो उन्होंने फिर से डीन रिसर्च का मुद्दा उठा दिया। कहा कि सीनियर शिक्षकों में प्रो. आरके सिंगला हैं, उनको यह जिम्मेदारी दी जाए। आखिर में सभी इसके लिए राजी हो गए।
प्राचार्य की दोबारा तैनाती को लेकर खींचतान
जीजीडीएसडी कॉलेज के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. भूषण के शर्मा के री अपाइंटमेंट का एजेंडा सामने आया तो इसको स्वीकृति दी जाने लगी। उसी दौरान सिंडिकेट सदस्य डॉ. केके शर्मा ने कहा कि वह डॉ. भूषण के साथ हैं लेकिन हजारों शिक्षकों का वह प्रतिनिधि यहां सिंडिकेट में कर रहे हैं। ऐसे में उनका हक नहीं मारा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह यह दोबारा तैनाती नहीं होनी चाहिए। उन्होेंने तर्क दिया कि यूजीसी, पंजाब सरकार व पीयू कलेंडर में नियम बनाए गए हैं कि प्रिंसिपल को 60 साल सेवानिवृत के बाद दोबारा उसी पद पर तैनात नहीं किया जा सकता। उन्होंने कई तर्क पेश किए। वीसी ने भी इस बात का समर्थन किया लेकिन अन्य सदस्य नहीं माने। डॉ. केके शर्मा व जगदीप ने वीसी को लिखित में शिकायत दर्ज कराई है।
ट्रांसजेंडरों की फीस माफ
ट्रांसजेंडरों की ट्यूशन फीस व एग्जामिनेशन फीस माफ करने को लेकर मुहर लगा दी गई है। सभी ने कहा कि इस पर पहले ही निर्णय हो जाना चाहिए था। इससे इस वर्ग को राहत मिलेगी। इस दौरान एसबीबीसी लुधियाना कॉलेज समेत तीन कॉलेजों में शिक्षकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया। साथ ही एक कमेटी इसकी जांच के लिए बनाई गई।
सीनेट का बुलाएंगे विशेष सत्र, पलटेंगे फैसला
सीनेट सदस्य डॉ. सुभाष शर्मा ने कहा है कि सेवानिवृत्ति के बाद प्राचार्यों की दोबारा तैनाती किसी हाल में नहीं हो सकती। पीयू कलेंडर में जो नियम बनाए गए हैं उनको सिंडिकेट ने दरकिनार कर निर्णय लिए हैं। यूजीसी के आदेशों का भी पालन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्द ही 20 सीनेट सदस्य वीसी को पत्र देकर सीनेट का विशेष सत्र बुलाएंगे और सिंडिकेट के नियम को पलटेंगे। कहा कि गलत निर्णय लेने का अधिकार सिंडिकेट को नहीं है।