फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीयू कंट्रोलर परमिंदर सिंह से पूछे गए 6 सवाल उनके जवाब, एग्जाम रिजल्ट का नया नियम

Thu, 15 Nov 2018 03:49 PM IST
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
Interview
विज्ञापन
परीक्षा की तैयारियों, नई व्यवस्थाओं आदि को लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी कंट्रोलर परमिंदर सिंह से बातचीत की गई। 7 जिलों के 2.50 लाख स्टूडेंट्स के एग्जाम पीयू 22 दिन में कराकर इतने ही दिन में रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। पेश हैं बातचीत के उसके अंश-
विज्ञापन


प्रश्न : यूजी, पीजी व लॉ के एग्जाम इस बार जल्दी हो रहे हैं। उसकी पुख्ता तैयारियां क्या हैं? पारदर्शिता के लिए क्या उपकरण पीयू के पास है।
उत्तर :
परीक्षाएं इस बार 3 नवंबर से 26 नवंबर के बीच होंगी। इसकेलिए 270 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 70 अनएडेड हैं। सभी सेंटर मानकों को पूरा कर रहे हैं। 22 दिन में एग्जाम हो जाएंगे और इतने ही दिन में रिजल्ट जारी करने का लक्ष्य तय किया है। मूल्यांकन केंद्र चंडीगढ़ केअलावा लुधियाना, होशियारपुर, मोगा, फिरोजपुर, खन्ना आदि जगह बनाए गए हैं।

प्रश्न : स्टूडेंट्स के सिटिंग प्लान को लेकर हर साल दिक्कतें खड़ी होती हैं। इस बार क्या व्यवस्था की गई है।
जवाब :
इस बार एक परीक्षा केंद्र पर कम से कम 250 और अधिकतमत 350 स्टूडेंट्स ही बैठ सकेंगे। अधिक स्टूडेंट्स सेंटरों पर आवंटित नहीं किए जाएंगे।

प्रश्न : हर बार सवाल उठाया जाता है कि पंजाबी में स्टूडेंट्स के पेपर कराए जाएं और पंजाबी भाषा के विशेषज्ञ ही उनकी जांच करें। इसके लिए क्या व्यवस्था है।
उत्तर :
चार हजार शिक्षकों का डाटा हमारे पास ऑनलाइन उपलब्ध है। मूल्यांकन के लिए शिक्षकों की कमी नहीं है। पंजाबी, हिंदी व अंग्रेजी के शिक्षक भी भरपूर हैं। जिस भाषा में छात्र पेपर देना चाहते हैं उन्हें उसी भाषा में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाता है।

प्रश्न : पीयू में डिग्रियों का अंबार लगा है। स्टूडेंट्स नहीं लेने आते। शिकायत ये भी रहती है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिल पाती।
उत्तर :
हर साल पीयू से 30 से 40 हजार प्राइवेट स्टूडेंट्स एग्जाम देते हैं। तमाम बाहर के भी होते हैं, जो रिजल्ट लेकर चले जाते हैं। डिग्री की सूचना मैसेज के जरिये उन्हें देते हैं। घर भी भिजवाते हैं, लेकिन कई के एड्रेस गलत होने के कारण डिग्रियां वापस आ रही हैं। प्राइवेट स्टूडेंट्स का कन्वोकेशन नहीं होता है, इसलिए पीयू ने जनवरी 2017 में डिग्री मेला लगाया था। हजारों छात्र अपनी डिग्रियां लेकर गए थे।

प्रश्न : आपके पास डीन कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल यानी डीसीडीसी का चार्ज भी रहा है। क्या कुछ नया किया।
उत्तर :
मुझे जो जिम्मेदारी मिली हैं उसका बखूबी पालन कर रहा हूं। डीसीडीसी का जब चार्ज मिला तो उसके बाद कॉलेजों का डाटा ऑनलाइन कर दिया। कॉलेज प्राचार्य व अन्य शिक्षकों को यहां तक नहीं आना पड़ता। वह ऑनलाइन ही अपनी बात कहते हैं और उसका जवाब उन्हें तुरंत मिल जाता है। कॉलेजों का डाटा ऑनलाइन करना आसान नहीं था। इसके लिए सभी का सहयोग मिला।
विज्ञापन

प्रश्न : कॉलेजों को मान्यता देने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन्सपेक्शन के नाम पर खेल होने के आरोप लगते हैं। इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए क्या कर रहे हैं।
उत्तर :
नियम पुराने बने हुए हैं। उन्हें हर साल दुरुस्त किया जाता है। 127 कॉलेजों का पूरा डाटा हमने ऑनलाइन कर दिया है। उनके मानकों को ऑनलाइन देखा जा सकता है। पूरी पारदर्शिता इससे झलकती है। नैक की तर्ज पर ही पोर्टल विकसित किया गया था, लेकिन उसके लिए तकनीकी टीम की जरूरत है, उसकी पूर्ति होने के बाद यह पोर्टल और रन करेगा और मान्यताएं कॉलेजों को ऑनलाइन देना शुरू करेंगे।

इससे इंस्पेक्शन आदि पर खर्च होने वाला टीए-डीए भी बच जाएगा। बची रकम कॉलेज अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में लगा सकेंगे। पहले मैनुअल काम होते थे, लेकिन अब नहीं। सब ऑनलाइन कर दिया गया है। इस व्यवस्था को अभी और दुरुस्त करने की तैयारी कर रहे हैं। वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क के जरिये भी 100 से अधिक कॉलेजों का ऑनलाइन डाटा जुटा लिया गया है। इसे कोई भी देख सकता है।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें