पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के शिक्षण संस्थानों को झटका देते हुए उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे से बाहर करने के सिंगल बेंच के आदेश खारिज कर दिए हैं। अब सभी शिक्षण संस्थानों को जमीन या इमारत के लिए प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान करना होगा। नगर निगम ने 29 जनवरी 2003 को जनरल हाउस के दौरान प्रस्ताव पारित करके कामर्शियल इमारतों को प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में लाने का निर्णय लिया था। इसके बाद प्रस्ताव प्रशासन को भेजा गया था।
प्रशासन ने इसमें शिक्षण संस्थानों को भी शामिल करने को कहा था, जिसके बाद संशोधन कर शिक्षण संस्थानों को भी इस दायरे में लाने का निर्णय लिया गया। इसके चलते 13 अगस्त 2004 को नोटिफिकेशन भी जारी कर दी गई। शिक्षण संस्थानों ने इसको हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के समक्ष चुनौती दी थी। सिंगल बेंच ने संस्थानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि नोटिफिकेशन प्रशासन ने जारी की है जबकि अधिकार निगम का है ऐसे में नोटिफिकेशन वैध नहीं है।
इसके खिलाफ नगर निगम ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील की। खंडपीठ ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि सिंगल बेंच के आदेश सही नहीं थे। नोटिफिकेशन जारी करने का अधिकार प्रशासन को न होने की दलील को भी खंडपीठ ने सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एक्ट में कहीं कोई ऐसा प्रावधान नहीं है जो शिक्षण संस्थानों को प्रॉपर्टी टैक्स से छूट देने की बात कहता हो।
साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि प्रशासन द्वारा 2004 में जारी की गई नोटिफिकेशन वैध है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में चंडीगढ़ म्यूनिसिपल कारपोरेशन टैक्स ऑन कामर्शियल, इंडस्ट्रियल एंड इंस्टीट्यूशनल लैंड एंड बिल्डिंग बायलॉज 2003 पर भी अपनी मुहर लगा दी। हाईकोर्ट के इस फैसले के चलते अब शिक्षण संस्थानों को जोन के अनुसार प्रॉपर्टी पर टैक्स का भुगतान करना होगा।