पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सेंट कबीर स्कूल को बड़ी राहत देते हुए खाली पड़ी 25 प्रतिशत सीटों को सत्र 2019-20 के लिए भरने की अनुमति दे दी है। इससे पहले स्कूल ने माइनॉरिटी स्टेटस बताते हुए 25 प्रतिशत सीटों पर आरटीई के तहत आर्थिक पिछड़ा वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में केस लंबित होने के चलते इन सीटों को रिक्त रखा गया था।
चंडीगढ़ शिक्षा निदेशक ने याचिका दाखिल कर बताया था कि 1988 में पहली बार कबीर एजुकेशन सोसाइटी ने एस्टेट ऑफिस में अर्जी देकर स्कूल चलाने के लिए जमीन मांगी थी। एस्टेट ऑफिस ने अक्तूबर 1988 में सोसाइटी को सेक्टर-26 में इसके लिए 20077 वर्ग फीट जमीन 99 वर्ष के लिए लीज पर दे दी थी।
उसी समय तय किया गया था कि स्कूल पर डीपीआई चंडीगढ़ द्वारा जारी निर्देश लागू होंगे। वर्ष 1996 में चंडीगढ़ प्रशासन ने सभी स्कूलों को 15 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक पिछड़े वर्ग के बच्चों को दाखिला देने के निर्देश दिए थे। सितंबर 2009 में केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर स्कूल को माइनॉरिटी स्टेटस देने का अधिकार राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश को सौंप दिया था।
स्कूल माइनॉरिटी स्टेटस के लिए इनसे ही एनओसी लेने का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2009 में शिक्षा के अधिकार लागू होने के बाद इस फैसले को कई स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी।