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खेल उजागर होने पर पीयू बैकफुट पर... कानून की पढ़ाई के लिए जारी प्रारंभिक मेरिट लिस्ट स्थगित की

Sun, 25 Oct 2020 03:30 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब विश्वविद्यालय - फोटो : फाइल फोटो
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कानून की पढ़ाई में प्रवेश के लिए पंजाब विश्वविद्यालय का खेल उजागर हुआ तो जारी की गई प्रारंभिक मेरिट लिस्ट स्थगित कर दी गई। पीयू इस मेरिट को लेकर विवादों में आ गई थी। यही नहीं शुक्रवार को विद्यार्थियों द्वारा हाईकोर्ट में इस प्रकरण को लेकर याचिका दायर हुई तो पीयू को बैकफुट पर आना पड़ा। साथ ही दर्जनों विद्यार्थियों ने भी पीयू की इस मेरिट पर आपत्तियां दायर की थी। अब नए सिरे से मेरिट लिस्ट जारी होगी। 

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पीयू ने बीए एलएलबी तीन वर्षीय व बीकॉम एलएलबी पांच वर्षीय कोर्स में दाखिले के लिए इस बार मेरिट को आधार माना। प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की गई। परीक्षा के नाम पर सभी विद्यार्थियों को बराबर-बराबर अंक दे दिए गए। बाकी अंक 12वीं कक्षा के जोड़े गए। प्रोस्पेक्ट्स में भी इसी का जिक्र किया गया। दो दिन पहले पीयू की ओर से इस कोर्स में प्रवेश के लिए टेंटेटिव मेरिट लिस्ट जारी की गई।

यह लिस्ट जारी होते ही विद्यार्थियों में हड़कंप मच गया, क्योंकि उनकी मेरिट जहां आनी थी वह बहुत पीछे हो गई। इसके पीछे कारण था कि पीयू की ओर से 12वीं में लीगल स्टडीज विषय पढ़े विद्यार्थियों को सीधे दो फीसदी अंक दे दिए गए। जिन विद्यार्थियों की मेरिट 40 पर आनी थी वह सीधे 150 से अधिक पहुंच गई। 

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तमाम विद्यार्थियों का सपना टूटने लगा तो उन्होंने आपत्तियां दायर की और पीयू की खेल को उजागर करना शुरू कर दिया। अमर उजाला ने विद्यार्थियों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। यही नहीं शुक्रवार को दो विद्यार्थियों ने हाईकोर्ट में यह याचिका दायर कर दी। सूत्रों का कहना है कि यह बात पीयू प्रशासन को पता लगी तो उन्होंने प्रारंभिक मेरिट लिस्ट निरस्त कर दी। सूत्रों का कहना है कि अब नए सिरे से मेरिट लिस्ट जारी होगी। उसमें लीगल स्टडीज विषय के अंक नहीं जोड़े जाएंगे।

ऐसा क्यों किया गया, दोषियों पर हो कार्रवाई
विद्यार्थियों ने कहा कि पहले ही प्रवेश परीक्षा व मेरिट के आधार पर प्रवेश को लेकर हाईकोर्ट में मामला चल रहा था। उस प्रकरण के कारण एडमिशन में देरी हुई और अब यह खेल कर दिया और मेरिट लिस्ट निरस्त कर दी। इस कारण अब और देरी होगी। विद्यार्थियों का इससे नुकसान होगा। 

छात्रों का कहना है कि जब प्रोस्पेक्ट्स में लीगल स्टडीज विषय को वेटेज देने का जिक्र नहीं किया गया था तो मेरिट में इसका प्रयोग क्यों किया गया। यह किसके निर्णय से हुआ। इस प्रकरण में दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि इससे विद्यार्थियों का मानसिक शोषण हुआ है। उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा है। हालांकि हाईकोर्ट में दायर याचिका में भी इस बिंदु को रखे जाने की बात सामने आ रही है।
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