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चंडीगढ़ के 8 बड़े निजी स्कूलों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत

Thu, 21 Jul 2016 11:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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शहर के निजी स्कूलों से रिटायर हुए टीचरों की लीव इनकैशमेंट की राशि और उस पर निजी स्कूल प्रबंधकों के रुख को लेकर उभरे विवाद को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हल कर दिया है।
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जस्टिस कुलदीप सिंह ने इस मामले पर दायर कई याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि यूटी प्रशासन की ओर से एडेड निजी स्कूलों की दी जाने वाली 95 प्रतिशत ग्रांट इन ऐड में रिटायर्ड टीचरों की लीव इनकैशमेंट की राशि भी शामिल होगी।

हाईकोर्ट के इस फैसले से शहर के उन आठ प्रमुख निजी स्कूलों को बड़ी राहत मिली है, जो यूटी प्रशासन से मिलने वाली ग्रांट इन ऐड के तहत चल रहे है। इन स्कूलों का कहना था कि यूटी प्रशासन की ओर से पैसा जारी होने पर ही वे रिटायर्ड टीचरों की लीव इनकैशमेंट की राशि दे सकेंगे।
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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि लीव इनकैशमेंट टीचरों को मिलने वाले वेतन का ही भाग है और चंडीगढ़ प्रशासन को यह राशि ग्रांट इन ऐड के तहत जारी करनी होगी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता टीचरों को तीन माह के भीतर लीव इनकैशमेंट का पैसा 9 प्रतिशत ब्याज के साथ जारी करने के आदेश दिए।

शहर के उक्त आठ निजी स्कूलों के कुछ रिटायर्ड टीचरों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर अपनी लीव इनकैशमेंट के भुगतान की मांग की थी। इन रिटायर्ड टीचरों को उनके स्कूल प्रबंधकों का कहना था कि यूटी प्रशासन जैसे ही लीव इनकैशमेंट की राशि उन्हें जारी करेगा, वे टीचरों को उसका भुगतान कर देंगे। उधर, यूटी प्रशासन ने कहना था कि प्रशासन निजी एडेड स्कूलों को 95 प्रतिशत ग्रांट इन ऐड देते हैं। इस राशि में स्कूलों के शिक्षकों का वेतन व अन्य भत्तों से जुड़ी राशि भी शामिल होती है।

फिर भी, इसमें टीचरों की लीव इनकैशमेंट को शामिल नहीं किया गया है। यूटी प्रशासन का कहना था कि लीव इनकैशमेंट वेतन का हिस्सा नहीं है और इसका भुगतान टीचरों को अलग से किया जाना चाहिए। प्रशासन ने हाईकोर्ट में यह भी कहा कि लीव इनकैशमेंट को ग्रांट इन ऐड के तहत जारी नहीं किया जा सकता।

लीव इनकैशमेंट का भुगतान संबंधित स्कूल प्रबंधकों को अपनी ओर से टीचरों को करना होगा, लेकिन याचिकाकर्ता टीचरों का कहना था कि लीव इनकैशमेंट उनके वेतन का ही हिस्सा है, इसलिए यूटी प्रशासन को इसे ग्रांट इन ऐड के तहत जारी करना चाहिए। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि लीव इनकैशमेंट टीचरों के वेतन का ही हिस्सा है। ऐसे में निजी स्कूल प्रबंधन यूटी प्रशासन से यह राशि ग्रांट इन ऐड के तहत मांग सकते हैं।
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