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पेक चंडीगढ़ में पीएचडी वाले अभ्यर्थी ही पा सकेंगे शिक्षक की नौकरी, यूटी प्रशासन ने लगाई मुहर

Fri, 02 Oct 2020 10:13 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) चंडीगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। अब जितनी भी शिक्षक पदों पर भर्तियां होंगी उसके लिए अभ्यर्थी का पीएचडी होना अनिवार्य होगा। पेक प्रशासन के इस प्रस्ताव पर यूटी प्रशासन ने मुहर लगा दी है। इसी शैक्षिक सत्र से यह नियम लागू हो जाएगा।
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ऐसे तैयार किया प्रस्ताव
पेक में नौ विभाग संचालित हैं। इसके अलावा सात से अधिक सेंटर हैं। इन विभागों व सेंटरों का संचालन करने का जिम्मा लगभग 105 शिक्षकों के पास है। विद्यार्थियों की संख्या यहां 3300 से अधिक है। छात्रों की संख्या के मुताबिक शिक्षकों की संख्या में बड़ी कमी है। पेक प्रशासन अभी तक जैसे-तैसे काम चला रहा था।

कुछ गेस्ट फैकल्टी भी रखी जा रही थी तो उसकी योग्यता के लिए पीएचडी अनिवार्य नहीं थी। अन्य शिक्षकों की भर्ती के लिए भी रिसर्च पार्ट महत्वपूर्ण नहीं था। तमाम विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती पीएचडी की डिग्री के जरिए होने लगी तो पेक ने भी इस पर विचार किया और इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया। यह प्रस्ताव यूटी प्रशासन को भेजा गया। वहां भी इस पर विचार हुआ, लेकिन इसको मंजूरी दे दी गई।
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छात्र-शिक्षक अनुपात में बड़ा अंतर

पेक में छात्रों की संख्या 3300 से अधिक है जबकि शिक्षक महज 105 हैं। कम से कम 50 शिक्षकों की आवश्यकता पेक को महसूस हो रही है, लेकिन अब तक इसकी पूर्ति नहीं की गई।  इसका असर रैंकिंग पर पड़ रहा है। हालांकि निरफ में पेक को 68 रैंक मिली है जो पिछले वर्ष से बेहतर रही है। जानकारों का कहना है कि यदि शिक्षक व छात्र अनुपात बेहतर होता तो इस रैंक में और बेहतर सुधार होता। शिक्षक भर्ती का रास्ता कब साफ होगा? यह तय नहीं है, लेकिन जरूरत के हिसाब से शिक्षक रखे जा सकते हैं। उसके लिए यूटी प्रशासन की अनुमति जरूरी है।

शिक्षकों पर पड़ रहा अतिरिक्त भार
पेक में शिक्षकों की संख्या कम होने के कारण उन पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। इस कारण शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। अब विकल्प आधारित विषय विद्यार्थियों को पढ़ाए जाएंगे तो स्थिति और खराब होगी यानी शिक्षकों की जरूरत पेक को अधिक पड़ेगी। कुछ शिक्षकों का तो यह भी कहना है कि इस अतिरिक्त भार के कारण वह अपने रिसर्च के कार्य नहीं कर पा रहे हैं। पब्लिकेशंस की संख्या में भी कमी आई है।

शिक्षक भर्ती के लिए अब पीएचडी अनिवार्य कर दी गई है। इस प्रस्ताव पर यूटी प्रशासन ने मुहर लगा दी है। इसके जरिए शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार आएगा। नए सत्र से यह नियम लागू कर दिया गया है।
- प्रो. धीरज सांघी, निदेशक, पेक
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