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1960 में बन रहा था आईआईटी, अब तक एनआईटी भी नहीं बन पाया पेक... बना तो होंगे कई लाभ

Thu, 08 Oct 2020 12:29 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, चंडीगढ़

सार

  • एनआईटी बना तो यूटी प्रशासन का नियंत्रण हो जाएगा खत्म, केंद्र के अधीन होगा
  • प्रशासक के पास है फाइल, अब तक की कार्रवाई के बारे में किसी को नहीं पता
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पेक चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) को 1960 में आईआईटी बनाने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन आज यह नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) तक नहीं बन पा रहा है। इसका प्रमुख कारण ये माना जा रहा है कि यूटी प्रशासन इस पर से अपना नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहता। साथ ही राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी अभाव है।
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एनआईटी बनाने के लिए केवल एक फाइल यूटी प्रशासन को शिक्षा मंत्रालय को भेजनी है और आगे की कार्रवाई वहां से शुरू होगी। यदि पेक एनआईटी बनेगा तो सर्वाधिक लाभ चंडीगढ़ के ही युवाओं को मिलेगा। साथ ही चंडीगढ़ का नाम इस संस्थान के जरिए और आगे जाएगा। अब सवाल उठता है कि आखिर यह पहल करे तो कौन।

इस साल जनवरी में पेक ने सेंट्रल स्टेट्स के किसी भी संस्थान का दर्जा देने के लिए फाइल यूटी प्रशासन को भेजी थी। अब यह फाइल प्रशासक के पास है। कार्रवाई अब तक क्या हुई? यह किसी को नहीं पता। सूत्रों का कहना है कि चंडीगढ़ प्रशासक इस कार्य के लिए लगे हुए हैं। वर्ष 2021 पेक के लिए नया तोहफा लेकर आ सकता है।
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एनआईटी बनने से क्या होगा लाभ

- केंद्र सरकार से सीधे कंट्रोल होगा। बजट का अभाव नहीं होगा।
- पर्याप्त संसाधन होंगे। चाहे वह उपकरण हो या फिर फैकल्टी।
- रिसर्च के क्षेत्र में नया कीर्तिमान बनाया जाएगा। पब्लिकेशंस की संख्या में वृद्धि होगी।
- चंडीगढ़ के युवाओं को 50 फीसदी तक आरक्षण मिल सकेगा। हालांकि यह अभी भी मिल रहा है।
- देश व दुनिया की कंपनियां पेक को जान सकेंगे और एनआईटी के नाम से छात्रों को नौकरी के लिए ले जा सकेंगी।
- शिक्षा गुणवत्ता में और सुधार आएगा।
- यह तय हो जाएगा कि निदेशक व अन्य पदों को कौन-कौन से अधिकार मिलेंगे।
- रैंकिंग में बड़ा सुधार होगा।
- एनआईटी बनने से एक ही नियम लागू होगा।

पेक के एनआईटी बनाने का ये बड़ा मानक

देशभर में एनआईटी की संख्या 31 है। इनमें से 20 एनआईटी ऐसी हैं जो प्रदर्शन में पेक से काफी पीछे हैं। फैकल्टी हो या फिर शिक्षा गुणवत्ता। तीन से चार एनआईटी रैंकिंग आदि में पेक के बराबर हैं। पेक यदि एनआईटी बनेगा तो इसका मूल्य बढ़ेगा। देश-दुनिया में पहचाना जा सकेगा। जानकारों का कहना है कि चंडीगढ़ से 400 किमी दूर चले जाएं तो पेक को लोग नहीं जानते।

हैदराबाद, बंगलुरू की कंपनियों से जब प्लेसमेंट की बात की जाती है तो वह भी पेक को बहुत कम जानती हैं। पेक चंडीगढ़ के लिए बड़ा संस्थान है, लेकिन एनआईटी बनेगा तो देशभर में उसी के नाम से पहचाना जाएगा। एनआईटी या आईईएसटी किसी भी संस्थान को बनाने का कोई निर्धारित मानक नहीं है। पेक के लिए रास्ते खुले हैं, क्योंकि यह सरकारी संस्थान है, जिसे और चमकाया जा सकता है।

यह अब तक तय नहीं
- पेक की सोसाइटी को अब तक मान्यता नहीं मिल पाई जबकि वर्ष 2004 में यह प्रस्ताव यूजीसी को भेजा गया था। इसको ‘ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रैक्चर’ का नाम भी दिया गया है।
- यूटी प्रशासन, गवर्निंग बॉडी, पेक निदेशक और डीन के अधिकार क्षेत्र कौन-कौनसे हैं यह भी तय नहीं।
- किस नियम के तहत कार्य होगा या प्रोजेक्ट बनेगा, इसके लिए हर निदेशक ने अलग-अलग नियम अपनाए। किसी ने पंजाब सरकार का नियम तो किसी ने यूजीसी तो किसी ने चंडीगढ़ व अन्य शिक्षण संस्थानों का नियम अपनाया।
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ऐसे हुआ काम तो पेक को एनआईटी बनने से कोई नहीं रोक सकता

एनआईटी चंडीगढ़ के सबसे नजदीक कुरुक्षेत्र व जालंधर में है। पेक के पास अपना भवन है। अपने संसाधन व फैकल्टी हैं। इसको एनआईटी बनाने के लिए यूटी प्रशासन को पेक की ओर से फाइल को देखना होगा और प्रशासक उस फाइल को पास करके सीधे शिक्षा मंत्रालय भेजें और उसके बाद समय समय पर फाइल की प्रगति के बारे में जानकारी करना और उसके लिए दबाव बनाया गया तो पेक को एनआईटी बनते देर नहीं लगेगी। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासक को अपना मन बनाना होगा।

जनवरी में यूटी प्रशासन को फाइल भेजी थी। पेक को कोई भी सेंट्रल स्टेट्स जैसे एनआईटी, आईईएसटी का दर्जा देने की बात की गई की। मार्च में इस पर काम होना था, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण प्रभावित हो गया।
- प्रो. धीरज सांघी, निदेशक, पेक

इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। शिक्षा सचिव बेहतर जानते होंगे। हालांकि किसी शिक्षण संस्थान को आईआईटी आदि में बदलने की एक प्रक्रिया होती है। उसका पालन करना पड़ता है।
- मनोज परिदा, प्रशासक के सलाहकार
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