एक तो चंडीगढ़ कोटे के तहत दाखिला मिला और दूसरा उनमें से कई विद्यार्थियों को हॉस्टल भी आवंटित होता था, क्योंकि वह इस बेस पर हॉस्टल लेते थे कि उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई चंडीगढ़ से की है लेकिन वह रहने वाले 100 से 200 किमी दूर के हैं। पेक ने इस बात अधिक गौर किया और उसके बाद निर्णय लिया।
ये छात्र कर लेंगे रहने की व्यवस्था
पेक का सोचना है कि चंडीगढ़ कोटे के इन विद्यार्थियों को यदि हॉस्टल नहीं मिलता है तो इन्हें अधिक परेशानी का सामना नहीं करना होगा, क्योंकि इंटरमीडिएट करने के दौरान अपने रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं या फिर उनके अपने आवास हैं। हॉस्टल उन विद्यार्थियों को दिया जाएगा जो दूर के क्षेत्रों से आए हैं।
पेक को चाहिए दो और हॉस्टल
पेक में छह हॉस्टल हैं। पेक को दो और हॉस्टलों की आवश्यकता है। इनकी क्षमता कम से कम एक हजार बेड से अधिक की हो। इसका प्रस्ताव पेक ने तैयार किया है लेकिन कामयाबी मिले तो बात बने। यह हॉस्टल बनते ही पेक के अधिकांश विद्यार्थियों के रहने की समस्या अपने आप हल हो जाएगी। पेक को उम्मीद है कि यह काम जल्द होगा।
हॉस्टलों में सीटों की संख्या कम हैं और छात्र अधिक। ऐसे में इस बार एमटेक और पीएचडी के विद्यार्थियों को छात्रावास नहीं दिए जाएंगे। साथ ही चंडीगढ़ कोटे से आने वाले विद्यार्थियों को रूम आवंटित नहीं होंगे। - प्रो. धीरज सांघी, निदेशक, पेक।