पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। साथ ही पंजाब यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर जवाब भी तलब कर लिया है। सारा मामला पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए बारहवीं में लीगल स्टडीज विषय के चार अतिरिक्त अंक दिए जाने से जुड़ा है।
चंडीगढ़ की छात्रा मलायिका ने एडवोकेट संदीप मौदगिल के माध्यम से याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया कि इस बार पंजाब यूनिवर्सिटी पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं कर रही है। इस बार बारहवीं की परीक्षा के अंकों के आधार पर प्रवेश देने का निर्णय लिया गया है।
इसके साथ ही पीयू ने 2 सितंबर को निर्णय लेते हुए उन छात्रों को चार अंक अतिरिक्त दिए देने का निर्णय लिया है जिन्होंने बारहवीं में लीगल स्टडीज का पेपर दिया हो। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने पीयू को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया था।
इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी ने अचानक बीए एलएलबी के आवेदकों को चार अतिरिक्त अंक का लाभ न देने का निर्णय ले लिया, जबकि बीकॉम एलएलबी के आवेदकों को इसका लाभ दिया जा रहा है। हाईकोर्ट से याची ने अपील की कि इस प्रकार का भेदभाव न होने दिया जाए क्योंकि पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा पहले जारी मेरिट सूची में उसका नाम था। चार अंक देने का फैसला वापस लेने के बाद याची का नाम उस सूची से बाहर हो गया है। याचिका पर अब हाईकोर्ट ने पीयू को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।