कुछ दिनों के बाद बच्चों को भारी स्कूल बैग ढोने से राहत मिल जाएगी। वह किताबों की बजाए स्मार्ट तरीके से टैबलेट पर पढ़ाई करेंगे। यूटी प्रशासन ने स्कूली बच्चों को टैबलेट देने की योजना तैयार कर ली है।
इसी टैबलेट पर पूरा सिलेबस और किताबें उपलब्ध होंगी। यानि पढ़ाई भी पूरी तरह से पेपरलेस होने जा रही है। प्रशासन ने प्रस्ताव तैयार कर टैबलेट खरीदने के विकल्पों पर काम करना शुरू कर दिया है।
बताया जा रहा है कि कैनेडियन हाई कमीशन ने सस्ती दरों पर टैबलेट उपलब्ध करवाने की पेशकश प्रशासन को की है। अब प्रशासन कमीशन के अधिकारियों से मीटिंग कर फैसला लेगा। हालांकि टेंडर जारी कर ही टैबलेट खरीदे जाएंगे।
यूटी प्रशासक वीपी सिंह बदनोर ने बच्चों को बैग के बोझ से और होमवर्क इत्यादि के झंझट से मुक्त करने के आदेश प्रशासन को दिए हैं। उन्होंने प्रशासक का कार्यभार संभालने के बाद ही शहर में अच्छे बोर्डिंग स्कूल शुरू करने की इच्छा जताई थी।
20 स्कूलों में चल रही स्मार्ट क्लास
किताबें
- फोटो : demo pic
रविवार को प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में भी बदनोर ने इसका जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को जो काम करवाना हो वह स्कूल में ही करवाया जाए। घर में होमवर्क का झंझट न हो।
घर पर उसे खेलने, टीवी देखने और दूसरे कामों का समय मिलना चाहिए। उन्होंने टैबलेट दिए जाने के प्रस्ताव का जिक्र भी किया था, लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण संक्षिप्त में ही जानकारी दी।
20 स्कूलों में चल रही स्मार्ट क्लास :
चंडीगढ़ के 20 गवर्नमेंट और निजी स्कूलों में 200 स्मार्ट क्लास रूम हैं। स्मार्ट क्लास रूम में प्रोजेक्टर की मदद बच्चों को पढ़ाया जाता है। स्मार्ट क्लास रूम के बाद इसमें दूसरी कड़ी जोड़ते हुए अब प्रशासन बच्चों को टैबलेट देगा।
जो चैप्टर शिक्षक पढ़ाएगा वह बच्चों के टैबलेट पर उपलब्ध होगा। विदेशों में इस प्रक्रिया से ही बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। टेकभनोलॉजी से जोड़ने और बैग के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए यूटी प्रशासन यह नई पहल करने जा रहा है।
बच्चों को टैबलेट के जरिए पढ़ाने की योजना है। इस प्रस्ताव पर काम हो रहा है। 20 स्कूलों के 200 स्मार्ट क्लास रूम में पहले से ही एडवांस्ड तरीके से पढ़ाया जा रहा है। टैबलेट को भी इसी का सेकेंड फेज कहा जा सकता है। - सर्वजीत सिंह, वित्त एवं शिक्षा सचिव, चंडीगढ़।