पंजाब यूनिवर्सिटी में चुनाव के लिए काफी समय पड़ा है, लेकिन अभी से ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ शुरू हो गई है। जिन्हें प्रधानगी नहीं मिली, वे अलग-अलग पार्टियों में जाने लगे हैं। सोशल मीडिया में भी इस तरह की पोस्ट वायरल की जा रही हैं।
हाल ही में सोई ने अपने एक कार्यकर्ता को पार्टी से बाहर कर दिया है। आरोप लगे हैं कि कार्यकर्ता नवी खेमकरन पार्टी विरोधी गतिविधियों में था और प्रधान पद की डिमांड कर रहा था। सोई के कैंपस प्रधान करन रंधावा ने कहा कि चंडीगढ़ जोन के प्रधान विक्की मिड्डूखेड़ा की तरफ से नवी खेमकरन को पार्टी से बाहर करने के आदेश हुए थे।
पहले तो सोई की तरफ से यही ब्यान जारी किया गया। वहीं अब शुक्रवार को खबर आई कि नवी खेमकरन को पूसू का प्रधान बना दिया गया है। इतना ही नहीं बाकायदा पुराने और नए पोस्टर को सोशल मीडिया में वायरल किया जा रहा है। ‘पीयू लाइफ’ नाम से बने एक फेसबुक पेज पर दोनों ही पोस्टर अपलोड कर किसी ने लिखा है कि- पूसू पहले तो स्टूडेंट्स को कहती थी कि सोई को वोट न डालो, अब सोई के मुख्य कार्यकर्ता को अपना प्रधान बना लिया। हालांकि यह तो नहीं पता कि यह पेज किसका है और फोटो किसने अपलोड की, लेकिन बात पूसू की खिलाफत में है, तो जाहिर है कि कोई पूसू समर्थक तो नहीं है।
सभी भूल गए मुद्दा
पीयू के चुनाव सितंबर में होने हैं। पिछले दिनों फीस बढ़ोतरी के फैसले को वापस कराने के लिए भिड़ी सभी पार्टियां इसे चुनाव का मुद्दा बनाना चाहती हैं। वहीं फीस बढ़ोतरी प्रकरण के दौरान सभी पार्टियां पीयू को सेंट्रल फंडिंग यूनिवर्सिटी की मांग पकड़े हुए थे, लेकिन अब सभी इस बात को भूल गए। हालांकि इस बार चार पार्टियों में जोरदार मुकाबला है। हालांकि मुद्दे क्या रहेंगे, अभी कोई खुलकर नहीं बता रहा।