पेरीफेरी और स्लम एरिया के बच्चों को भी अब शहरी बच्चों की तरह पढ़ाई के भरपूर अवसर मिलेंगे। ऐसे बच्चों को पढ़ाई से वंचित न रहना पड़े इसके लिए प्रशासन छह नए स्कूल बनाएगा। 114 करोड़ रुपये से इन स्कूलों का निर्माण होगा। केंद्र सरकार ने फंड को भी मंजूरी दे दी है।
शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि 2017 की शुरुआत में इन स्कूलों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसके लिए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। आर्किटेक्ट डिपार्टमेंट ने इन स्कूलों की ड्राइंग और नक्शों पर काम शुरू कर दिया है।
ये स्कूल मौजूदा स्कूलों से भिन्न होंगे। यह ऐसे स्कूल होंगे जिनमें बच्चों को होम वर्क भी करवाया जाएगा। बहुत से बच्चों के अभिभावक पढ़े-लिखे नहीं होते जिस कारण उन्हें वह बच्चों को पढ़ाई-लिखाई नहीं करवा पाते।
ऐसे बच्चों को इन स्कूलों में दोहरा फायदा मिलेगा। बच्चों को स्कूल में ही सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। इनमें मलोया में दो, धनास में एक, मौलीजागरां में एक, सेक्टर-12 में एक और एक रायपुर खुर्द में बनेगा।
पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने सितंबर में 4 स्कूलों केउद्घाटन अवसर पर चंडीगढ़ में उच्च गुणवत्ता के बोर्डिंग स्कूल बनाने की इच्छा जाहिर की थी। सितंबर में सेक्टर-48, 49 और मनीमाजरा में दो स्कूलों की सौगात यूटी को मिली थी।
प्रशासक बदनौर ने इच्छा जाहिर की थी कि स्कूलों को डबल शिफ्ट में चलाने की बजाए बोर्डिंग करना चाहिए। आपको बता दें कि स्लम एरिया और पेरीफेरी एरिया के अधिकतर स्कूल डबल शिफ्ट में चलते हैं।
इन स्कूलों के बनने से कम सीजीपीए वाले बच्चों को भी पढ़ाई से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। अभी बहुत से बच्चों को सीजीपीए कम होने के कारण स्कूलों में दाखिला मिलने में दिक्कत आती है। हर साल बच्चे और उनके अभिभावक प्रदर्शन करते हैं। नए स्कूलों के बनने से स्कूलों में सीटें भी बढ़ जाएंगी।