बीएड करने के इच्छुक युवाओं के लिए बड़ी खबर। देश की एक यूनिवर्सिटी ने अपने यहां एग्जाम के पैटर्न में बदलाव किया है। प्रथम और द्वितीय वर्ष के प्रैक्टिकल के कुल अंकों में से अब कॉलेज भी 20 नंबर विद्यार्थियों को दे सकेंगे। जबकि अभी तक प्रैक्टिकल के सभी नंबर देने का अधिकार केवल यूनिवर्सिटी की तरफ से आने वाले बाहरी परीक्षक के पास था।
जींद की सीआरएसयू (चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी) ने इस वर्ष से ही यह बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। कुछ माह पहले प्रदेश के सभी बीएड कॉलेज एमडीयू और अन्य यूनिवर्सिटी से हटाकर जींद यूनिवर्सिटी को दिए गए हैं। जींद यूनिवर्सिटी ने बीएड का बाकी का पैटर्न पहले की भांति रखा है, लेकिन प्रैक्टिकल के अंकों के संबंध में बड़ा फेरबदल किया है।
अभी तक बीएड प्रथम वर्ष में रीडिंग एंड रिफलेक्टिंग ऑन टेक्स्ट, ड्रामा एंड आर्ट इन एजुकेशन, क्रिटिकल अंडरस्टेंडिंग ऑफ आईसीटी और अंडरस्टेंडिंग दी सेल्फ सब्जेक्ट के लिए 50-50 अंकों के प्रैक्टिकल निर्धारित थे, जो यूनिवर्सिटी की तरफ से आने वाले बाहरी परीक्षक देते थे। नए पैटर्न के तहत प्रैक्टिकल के नंबर तो 50 ही रहेंगे, लेकिन अब 30 नंबर बाहरी परीक्षक और 20 नंबर कॉलेज की तरफ से नियुक्त आंतरिक परीक्षक दे सकेंगे।
इसी तरह, द्वितीय वर्ष के स्किल एंड टीचिंग के सब्जेक्ट में भी 80 अंक बाहरी परीक्षक और 20 अंक आंतरिक परीक्षक दे सकेगा। नया पैटर्न इसी शैक्षणिक वर्ष से लागू किया गया है।
कॉलेजों की छूट पड़ न जाए भारी
यूनिवर्सिटी की तरफ से नया पैटर्न शुरू कर दिया गया है, लेकिन जिस तरीके से कॉलेजों को छूट दी गई है उसका गलत फायदा उठाया जा सकता है। कोई भी कॉलेज यह नहीं चाहेगा कि उसके विद्यार्थियों का रिजल्ट खराब हो। ऐसे में साठगांठ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
प्रदेश में बीएड की स्थिति
प्रदेश भर में बीएड के लगभग 524 बीएड कॉलेज हैं, जिसमें 60,672 सीटें आवंटित हैं। मौजूदा सत्र में करीब 32 हजार सीटों पर एडमिशन हुआ है, जबकि बाकी सीटें खाली हैं।
बीएड प्रथम और द्वितीय वर्ष के प्रैक्टिकल के संबंध में बदलाव किया गया है। अब कॉलेज भी प्रैक्टिकल के अधिकतम 20 नंबर दे सकेंगे। जबकि अभी तक यूनिवर्सिटी की तरफ से आने वाले परीक्षक ही अंक देते थे। साल 2015-16 सत्र से ही यूनिवर्सिटी ने नया पैटर्न शुरू कर दिया है।
- डॉ. सुरेखा खोखर, प्राचार्य सीआर कॉलेज ऑफ एजुकेशन