एक सप्ताह का रिजल्ट सामने आया है। इन कक्षाओं में विद्यार्थियों की उपस्थिति देखकर सभी हैरान हैं और खुश भी। क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थी कक्षाओं में आते नहीं थे जो आज ऑनस्क्रीन पर दिख रहे हैं। साथ ही कुछ स्टूडेंट ऐसे हैं जो मास्क भी लगाकर पढ़ाई करते हैं। शिक्षक कहते हैं कि यह विद्यार्थी एक ही दिन नहीं बल्कि सप्ताहभर से लगातार ऑनलाइन कक्षाओं में हिस्सा ले रहे हैं और उन्हें बेहतर समझ में भी आ रहा है। यानि शिक्षण कार्य प्रभावी हो रहा है।
मैनुअल कक्षाएं लगाने का झंझट हो सकता है खत्म
इस कोरोना ने विपरीत परिस्थितियों में काम करने की जो सीख शिक्षकों व विद्यार्थियों को दी है वह भविष्य भी में भी काम आएगी और लोग ऑनलाइन पढ़ाई की ओर ज्यादा आकर्षित होंगे। ऑनलाइन कोर्सेज की संख्या भी बढ़ेगी और विद्यार्थियों की संख्या भी। जिस तरह पीयू के शिक्षकों की कक्षा में विद्यार्थी ऑनलाइन उपस्थिति 15 दिन तक रखेंगे तो इस बीच शिक्षक कोर्स भी पूरा कर देंगे।
साथ ही विद्यार्थियों की जिज्ञासा को भी शांत किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से मैनुअल कक्षाएं नहीं लगानी पड़ेंगी या फिर कम दिन की कक्षाएं लगेंगी। इससे पीयू जल्द एग्जाम करा सकता है और रिजल्ट भी समय से आएंगे। यदि मैनुअल कक्षाएं देरी तक चलेंगी तो दिक्कतें बढ़ेंगी और अगला शैक्षिक सत्र लेट होगा।
इस समय ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। कुछ विद्यार्थियों को नेट संबंधित दिक्कतें आ रही हैं। कुछ रिचार्ज नहीं करा पा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पीयू इन विद्यार्थियों को नेट की सुविधा दे सकता है। इसके लिए पीयू को रिचार्ज कराना होगा। मोबाइल कंपनियां एक से बढ़कर एक प्लान दे रही हैं। इन विद्यार्थियों की लिस्ट तैयार करके यह सुविधा दी जा सकती है।
इसमें पीयू का अधिक खर्च नहीं आएगा। पीयू प्रशासन इस भुगतान की भरपाई अपने बिजली बिल बचाकर आदि से कर सकता है। जब मैनुअल कक्षाएं पीयू में लगती हें जो बिजली की खपत होती है। हर माह सात से आठ लाख रुपये बिजली का बिल आ जाता है जो इस समय कम आएगा। सभी कार्यालय, विभाग बंद हैं। कई अन्य कार्य भी इस समय पीयू में बंद हैं जो पहले रेगुलर होते थे। वह पैसा भी पीयू के खजाने में बच रहा है। जानकारों का कहना है कि पीयू प्रशासन विद्यार्थियों को नेट की सुविधा देकर अपने में बड़ा काम कर सकता है।
स्टूडेंट्स ऑनलाइन कक्षाओं में काफी रुचि ले रहे हैं और उनकी उपस्थिति भी अच्छी आ रही है। यह खुशी की बात है। साथ ही शिक्षण कार्य भी प्रभावी हो रहा है। इससे जल्द कोर्स पूरा हो जाएगा। - प्रो. शंकरजी झा, डीयूआई पीयू