केंद्र सरकार पांच साल में डिसेबल स्टूडेंट्स को यूनिवर्सिटी, कॉलेज, स्कूल में क्या क्या सुविधाएं मिलीं, इसकी जांच करेगी। जहां भी गड़बड़ी मिली तो कड़ी कार्रवाई होगी। चंडीगढ़ के कुछ कॉलेजों को भनक लगते ही तो वह अपने डॉक्यूमेंट व सुविधाओं को परख रहे हैं। देशभर के कुछ शिक्षण संस्थानों से डिसेबल विद्यार्थियों की कुछ गंभीर शिकायतें पीएमओ और यूजीसी को मिली थी, इसको लेकर केंद्र ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्र सरकार एक कमेटी बना रही है जो देशभर के शिक्षण संस्थानों की जांच करेगी।
केंद्र सरकार हर साल डिसेबल स्टूडेंट्स की सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये जारी करती है। यह रकम स्कॉलरशिप, उपकरण व मशीनें खरीदने, शिक्षकों की तैनाती करने, रैंप बनाने, हॉस्टल रूम बनाने, यूनीफार्म के लिए पैसे जारी करती है। इसका उपयोग करने के बाद शिक्षण संस्थान और रकम की मांग करते हैं। देशभर के कुछ शिक्षण संस्थानों से डिसेबल विद्यार्थियों की कुछ गंभीर शिकायतें पीएमओ, यूजीसी आदि जगहों पर पहुंची हैं। उन्होंने सुविधाओं की पोल खोल दी और सुबूत भी पेश किए।
कुछ दिव्यांगों ने बताया कि उन्हें हॉस्टल के लिए रूम भी दूसरी व तीसरी मंजिल पर दे दिया गया। रैंप कहीं बने हैं तो कहीं नहीं। यूनिवर्सिटीज में जब समारोह होते हैं तो अवार्ड के लिए उन्हें भी बुलाया जाता है, लेकिन उस समारोह स्थल पर रैंप आदि की सुविधाएं नहीं होती हैं। उन्होंने पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाए। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने शिकायतों के बाद अपने अभिलेख खंगाले हैं। देखा है कि कितने रुपये किस राज्य को इन विद्यार्थियों की सुविधाओं के लिए भेजे हैं। अब सुविधाओं की जांच के लिए कमेटी बनाई जा रही हैं।
इस कमेटी में जांच के लिए स्थानीय सदस्य नहीं होंगे। दूसरे राज्यों की टीमें पहुंचेंगी। इसका पता कुछ कॉलेजों को लगा है तो वह तैयारी में लगे हैं।