हाईकोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार देश की सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज को विकास कार्यों के लिए अलग से ग्रांट जारी करती है। लेकिन यह ग्रांट पीयू को नहीं दी जा रही है। इसके अलावा पीयू ने विकास कार्यों के लिए 282.57 करोड़ की अलग से ग्रांट की मांग की थी। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया था।
अब यह रास्ता बचा
पंजाब यूनिवर्सिटी अपनी आय बढ़ाने के लिए हर कक्षा की सीटें बढ़ाने जा रहा है। साथ ही दो दर्जन से अधिक कोर्सेज शुरू किए जाएंगे। माना जा रहा है इस व्यवस्था से दस से 20 करोड़ रुपये सालाना आएंगे। इसके अलावा सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज की भी फीस बढ़ाई जा सकती है। सबसे बड़ी दिक्कत पीयू के समक्ष विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की आ रही है।
माना जा रहा है कि पीयू फिर से एमएचआरडी के माध्यम से केंद्र के खजाने तक पहुंचने की कोशिश करेगा। इसके लिए वीसी प्रो. राजकुमार भी प्रयास में लगे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि प्लान यह भी बना है कि कॉरपोरेट जगत से जुड़े लोगों से भी मदद ली जाएगी। साथ ही रिसर्च के जरिये भी एजेंसियों से फंडिंग की व्यवस्था की जा रही है।
शिक्षा को आगे बढ़ाना है और विद्यार्थियों का भविष्य बेहतर करना है तो सरकार को पैसे देने होंगे। अगर पीयू के लिए रकम नहीं है तो फिर छोटे छोटे विश्वविद्यालय खोलकर कोई फायदा नहीं है। पीयू बड़ी यूनिवर्सिटी है और इसे आगे बढ़ाना चाहिए। -दीपक कौशिक, सीनेट सदस्य एवं अध्यक्ष, पीयू इम्प्लाइज यूनियन
कोर्ट में फंडिंग को लेकर मामला तो चल रहा है लेकिन इसका नोटिफिकेशन अभी मुझे नहीं मिला है। जब यह मिलेगा तभी उसके बाद अगला कदम उठाया जाएगा। -प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू