बीएड कोर्स के प्रति विद्यार्थियों की रुचि लगातार कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण है बीएड दो साल की होना और रोजगार के अवसर कम। बीते सेशन से बीएड कोर्स की अवधि दो साल की कर दी गई है। दूसरा बड़ा कारण है कि पंजाब में निजी कॉलेजों को आंख मूंदकर सीटें अलॉट की गई। नतीजा यह हुआ कि दो बार एंट्रेंस टेस्ट लेने के बावजूद पंजाब के कॉलेजों में पांच हजार से भी ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं।
हाईकोर्ट ने भी बीएड की खाली सीटों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि निजी कॉलेजों को थोक में सीटें अलॉट की गई हैं। इस पर कमेटी बनाकर रिव्यू होना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस स्थिति पर जवाब मांगा हुआ है, जिस पर छह नवंबर को सुनवाई होगी। दरअसल पंजाब के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी कॉलेजों में बीएड दाखिले का एंट्रेंस टेस्ट कराने की जिम्मेदारी पंजाब यूनिवर्सिटी को मिली हुई है।
पीयू अपने और पंजाब सरकार के लिए संयुक्त रूप से बीएड का एंट्रेंस टेस्ट कराती है। सेशन शुरू होने के साथ 23 हजार 790 सीटें भरने के लिए आवेदन मांगे गए थे लेकिन 16 हजार 640 आवेदन ही आए, जो पास हो गए। इसके बाद खाली रह गई नौ हजार से ज्यादा सीटों पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा। इस पर पंजाब सरकार ने फिर से एंट्रेंस टेस्ट कराने का फैसला किया। तीन दिन पहले ही 9206 सीटों पर आवेदन मांगे गए,
लेकिन सिर्फ 4186 आवेदन आए और टेस्ट देने के लिए उससे भी कम 4037 आवेदक आए। जिनका रिजल्ट सोमवार देर रात जारी कर सीटें अलॉट कर दी गई हैं। पास हुए आवेदकों को अलॉट हुए कॉलेज में बुधवार से क्लास लगानी है। तीन दिन केरिकॉर्ड टाइम में एंट्रेस कराकर रिजल्ट भी घोषित कर दिया गया। इसके बावजूद पांच हजार सीटें खाली रह गईं। अब छह नवंबर को पीयू को हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करना है।
निजी कॉलेजों में सीटों की भरमार
पीयू केअलावा यह ज्वाइंट एंट्रेंस टेस्ट, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर केकॉलेजों केलिए होता है। पीयू के कॉलेजों में 350 ही सीटें हैं, जो पहले चरण में भर गई थी। जबकि पंजाब सरकार से सहायता प्राप्त 14 कॉलेजों की 2150 सीटों में से 1700 ही भर पाई थी। सबसे ज्यादा 21 हजार 290 सीटें पंजाब के 198 निजी कॉलेजों को अलॉट हैं, जो पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर से मान्यता प्राप्त हैं। इन 21 हजार 290 सीटों में से पहले चरण के एंट्रेंस टेस्ट में सिर्फ साढ़े 12 हजार और अब चार हजार सीटें ही भर पाईं।