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पीयू में अमर उजाला के ग्रुप डिस्कशन में चुनाव प्रत्याशी, मुद्दों पर अलग अलग राय

Tue, 05 Sep 2017 01:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव
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पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में अमर उजाला की ओर से एक ग्रुप डिक्सशन रखी गई, जिसमें चुनाव प्रत्याशियों ने अलग अलग मुद्दों पर अपनी अपनी राय पेश की। इन दिनों छात्र संघ चुनाव की ही चर्चा है। जिसे देखो वही प्रचार प्रसार और जीत के जोड़ तोड़ में लगा है। ऐसे में यह जरूरी है कि प्रधान पद के लिए मैदान में उतरे उम्मीदवार अलग-अलग मुद्दों पर क्या राय रखते हैं। जीतने के बाद उनकी प्राथमिकता क्या होंगी। लड़कियों के हितों के लिए क्या कदम उठाएंगे। आउटसाइडर्स को रोकने के लिए क्या करेंगे इत्यादि पर अमर उजाला ने ग्रुप डिस्कशन कराया। इसमें एनएसयूआई, एसएफएस, एबीवीपी, सोई, पूसू आदि प्रमुख संगठनों के उम्मीदवार शामिल हुए। मुख्य चार बिंदु चर्चा के लिए रखे गए थे।
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1. पीयू में पत्थरबाजी के लिए किसे जिम्मेदार मानते है?
एनएसयूआई के उम्मीदवार जशन कंबोज, सोई के हरमन सिंह, एबीवीपी के अविनाश पांडे, पूसू गठबंधन के कुलदीप ने एक सुर में इस घटना के लिए एसएफएस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं कैंपस का माहौल खराब करती हैं। किसी भी तरह की हिंसा को बढ़ावा देना गलत है। एसएफएस उम्मीदवार हसनप्रीत कौर ने कहा कि उनके ऊपर इल्जाम लगाना सरासर गलत है। कैंपस में हुई पत्थरबाजी में सभी शामिल थे। और यदि यह मान भी लिया जाए तो फिर फीस वापस कराने का श्रेय दूसरे संगठन कैसे ले सकते हैं। इसका श्रेय भी हमारा ही होना चाहिए।

2. क्या फीस बढ़ोतरी सही है?
सभी संगठनों के उम्मीदवारों ने बताया कि प्रबंधन का तर्क है कि यूनिवर्सिटी घाटे में है। इसे चलाने में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आय बढ़ाने के लिए अन्य विकल्पों के साथ फीस बढ़ाने का फैसला लिया गया। छात्रों ने इसे लेकर काफी आंदोलन किया और फीस वापस कराई। उम्मीदवारों का कहना है कि फीस नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। एक तबका इतनी फीस देने में समर्थ नहीं है।
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3. पीयू में ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बदलाव की जरूरत है?
सभी दलों ने सहमति जताते हुए कि कैंपस में ई-रिक्शा बढ़ाने चाहिए। नए छात्रों को गाड़ियां लाना मना है, तो टीचर्स पर भी यह लागू होना चाहिए।

4. महिला सुरक्षा पर क्या सोचते हैं?
एसएफएस उम्मीदवार हसनप्रीत ने कहा कि महिलाओं को हर तरह की आजादी की जरूरत है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर नाम कमा रही हैं। घर के चूल्हे चौके से लेकर देश विदेश के मुद्दों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आज जरूरत है दकियानूसी विचारों को तिलांजलि देने की। महिलाओं की सुरक्षा पुरुष प्रधान समाज की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यूनिवर्सिटी कैंपस में लड़कियों को अच्छा माहौल मिले इसके लिए वह प्रयास करेंगी।

एनएसयूआई के उम्मीदवार जशन कंबोज ने कहा कि महिला सुरक्षा निश्चित रूप से बड़ा मुद्दा है। कैंपस में भी ईव टीजिंग की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इन पर लगाम लगाने के लिए अपने स्तर पर भी प्रयास करेंगे और इन तमाम मामलों को यूनिवर्सिटी प्रबंधन के सामने भी लेकर जाएंगे।

सोई के हरमन सिंह ने अपनी राय रखी कि यूनिवर्सिटी कैंपस में उन्हें नहीं लगता कि महिला सुरक्षा में कोई खामी है। यहां लड़कियां अपनी मर्जी से कहीं भी आ जा सकती हैं। किसी भी मुद्दे पर बिना डरे अपने विचार रख सकती हैं। उन्हें नहीं लगता कि कैंपस में किसी लड़की में असुरक्षा की भावना हो।

पूसू गठबंधन के कुलदीप का मानना है कि महिला सुरक्षा के लिए निश्चित रूप से काम करने की जरूरत है। कैंपस में लड़कियों के साथ कोई आपराधिक वारदात न हो, इसकी जिम्मेदारी सभी की है। लड़कों को भी यह समझने की जरूरत है कि यूनिवर्सिटी कैंपस उनके परिवार की तरह है और इसमें पढ़ने वाले परिवार के सदस्य। ऐसे में हमें स्वस्थ माहौल स्थापित करना चाहिए।

एबीवीपी के अविनाश पांडे ने कहा कि माहौल में सुधार की जरूरत है। सिर्फ यूनिवर्सिटी कैंपस ही नहीं, शहर में भी लड़कियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुरुषों को अपने कंधों पर लेनी चाहिए। हम यदि किसी लड़की के साथ कहीं कुछ गलत होता देखें तो तमाशबीन बनने के बजाय उसका विरोध करें।
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