हरियाणा में प्रचार का अलग रंग।
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में मतदान के लिए अब केवल 15 दिन का समय शेष रह गया है, ऐसे में सभी प्रत्याशी जी जान से प्रचार में जुट गए हैं। सुबह सात बजे ही उनका काफिला गांवों की तरफ निकल पड़ता है और देर रात तक ही लौटता है।
इस चुनावी मौसम में भले ही बुजुर्ग मतदाता अक्सर यह कहते सुनाई देते हैं कि पांच साल में उनके गांव में कोई नेता नहीं आया, लेकिन इन दिनों सबसे ज्यादा पूछ उन्हीं की है। अपने-अपने हलकों में प्रचार का जिम्मा संभाले हुए नेता और प्रत्याशियों को जहां बुजुर्ग खड़े या बैठे मिलते हैं वहीं वे उनके पैर छूने चले जाते हैं। और तो और आशीर्वाद लेने के इन लम्हों का वे न केवल फोटो सेशन करवा रहे हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी खूब शेयर कर रहे हैं।
उनके इसी अंदाज पर चुनाव विश्लेषक मनोज कुमार का कहना है कि पैर छूना हरियाणा की संस्कृति का हिस्सा रहा है। यह बात जुदा है कि चुनावी माहौल में इसका रिवाज ज्यादा बढ़ जाता है। नेताओं के बारे में तो अकसर कहा भी जाता रहा है कि जो जितना झुकेगा, उतना ही उठेगा। यकीनन, पैर छूने से मिलने वाले आशीर्वाद के बाद कहीं न कहीं मतदाता पर प्रत्याशी अपनी छाप जरूर छोड़ जाता है। इस बार यह आशीर्वाद किन नेताओं को नए संसद भवन की सीढ़ी चढ़ाएगा यह तो 4 जून को ही पता चलेगा, लेकिन इतना जरूर है कि नेताओं के इस अंदाज ने चुनावी रंग को और चोखा जरूर कर दिया है।
नायब सैनी भी रहते हैं चर्चा में
खुद प्रदेश के नए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पैर छूने को लेकर अकसर चर्चा में रहते हैं। वे अपने राजनीतिक गुरु मनोहर लाल के सार्वजनिक मंचों पर खुलकर पैर छूते रहे हैं। बीते दिनों मनोहर लाल के जन्मदिन पर भी उनसे मुलाकात के समय सैनी ने उनसे आशीर्वाद लिया था।
मायावती के पैर छूने से पलट गया था मराठा का चुनाव
पैरा छूना कभी-कभी नेताओं के लिए गले की फांस भी बन जाता है। हरियाणा के करनाल में दस साल पहले बसपा सुप्रीमो की एक रैली में प्रत्याशी रहे वीरेंद्र मराठा ने मायावती के पैर छूए थे। उस समय मायावती 58 साल व मराठा 59 साल के थे। इस एक घटनाक्रम का असर ऐसा हुआ कि मराठा वोटर वीरेंद्र से नाराज हो गए और उनको हार झेलनी पड़ी थी।