हरियाणा के चार मुख्य संसदीय सचिव अब सरकार के गले की फांस बन गए हैं। सीपीएस की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से इनकी नियुक्ति के लिए किस कानूनी अधिकार का इस्तेमाल किया गया, यह सवाल हरियाणा सरकार के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। वीरवार को करीब डेढ़ घंटे चली सुनवाई के बावजूद हरियाणा सरकार कानूनी अधिकार के सवाल पर हाईकोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाई। इसके उलट सैलरी के माध्यम से सीपीएस को मंत्रियों से अलग बताने का हरियाणा सरकार का दांव उल्टा पड़ गया।
हरियाणा सरकार की ओर से बताया गया कि सीपीएस मंत्री नहीं हैं और न ही उन्हें मंत्रियों की सुविधाएं दी जाती हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल पूछा कि मंत्रियों को कितना वेतन दिया जाता है, इसके जवाब में हरियाणा सरकार ने बताया कि मंत्रियों का वेतन 50 हजार व भत्ते अतिरिक्त हैं। हाईकोर्ट ने पूछा कि सीपीएस का वेतन कितना है, इसका जवाब देते हुए हरियाणा सरकार ने बताया कि सीपीएस का वेतन 50 हजार व भत्ते अतिरिक्त हैं। हाईकोर्ट ने पूछा कि जब दोनों को 50 हजार का वेतन मिलता है और भत्ते अतिरिक्त हैं तो ऐसी स्थिति में मंत्रियों और सीपीएस में क्या फर्क है।