कैग ने हरियाणा के चर्चित आईएएस अशोक खेमका के कार्यकाल में गोदाम बनाने के लिए गैल वैल्यूम शीट खरीदने के मामले का ऑडिट शुरू कर दिया है। इस खरीद में हरियाणा सरकार ने गड़बड़ी की आशंका जताई थी और खेमका के कार्यकाल में हुए कामों का विशेष ऑडिट कराने का आग्रह किया था।
हरियाणा सरकार ने इसी मामले की जांच पहले सीबीआई से कराने का फैसला किया मगर मीडिया में खबर लीक होने के बाद सीबीआई जांच कराने का फैसला ऑडिट रिपोर्ट आने तक रोक लिया गया था। अब अगर ऑडिट में गड़बड़ी मिली तो सरकार सीबीआई या विजिलेंस जांच करवा सकती है।
खेमका ने रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ डील के तहत गुड़गांव में खरीदी गई जमीन का इंतकात रद्द किया था। तब से खेमका के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से कई जांच शुरू की जा चुकी हैं।
प्रदेश सरकार के पास रविंद्र कुमार ने शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि खेमका के कार्यकाल में गैल वैल्यूम शीट के गोदाम बनाने के काम में गड़बड़ी हुई है। इसकी सीबीआई जांच कराई जाए। इस पर सरकार ने कृषि विभाग के प्रधान सचिव रोशन लाल सैनी से रिपोर्ट मांगी, जिन्होंने सरकार को रिपोर्ट भेजकर कहा कि वित्तीय गड़बड़ी हुई है, इसलिए मामले की जांच विजिलेंस से कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने इसी मामले का विशेष ऑडिट कराने की भी मंजूरी दे दी और दूसरी फाइल पर सीबीआई से जांच कराने का फैसला कर दिया। सैनी ने हरियाणा के प्रधान महालेखाकर को 27 नवंबर, 2013 को पत्र लिखकर आग्रह किया कि हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के एमडी पद पर रहते हुए अशोक खेमका के कार्यकाल 11 जुलाई, 2008 से 23 अप्रैल, 2010 तक गोदाम बनाने में हुई गड़बड़ी का विशेष ऑडिट किया जाए।
प्रधान महालेखाकर ने कैग से मंजूरी मांगी और अब खेमका के कार्यकाल में गोदाम बनाने के मामले का ऑडिट शुरू कर दिया गया है।
हमने धान से मिलिंग कर चावल केंद्रीय पूल में भेजने का ऑडिट शुरू किय.ा है। उसमें अशोक खेमका के कार्यकाल के दौरान गैल वैल्यूम शीट के गोदाम बनाने के मामले का भी ऑडिट किया जाएगा।
ओंकार नाथ, प्रधान महालेखाकर, हरियाणा
ऑडिट टीम ने ऑडिट शुरू कर दिया है। टीम ने हमसे कुछ रिकॉर्ड मांगा है। उन्हें रिकार्ड दे दिया जाएगा।
रमेश कृष्ण, प्रबंध निदेशक, हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन
ऑडिट टीम ने वेयर हाउसिंग कारपोरेशन से 21 बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। उनमें मुख्य हैं-
. सारे गोदामों पर गैल वैल्यूम शीट लगाने के क्या कारण थे?
. क्या कृषि विभाग से मंजूरी ली गई थी?
. क्या गैल वैल्यूम शीट लगाने से पहले यह परखा गया था कि भारत में बनी गैल वैल्यूम शीट अच्छी क्वालिटी की नहीं थी?
. क्या पहले से बने एस्बेस्टस शीट के गोदामों में रखे अनाज और उसके स्वास्थ्य पर प्रभाव की स्टडी करवाई गई थी?
. क्या ऐसी कोई स्टडी हुई थी जो डोंग बू ब्रांड गैल वैल्यूम शीट दुनिया में सबसे अच्छी बताती हो?
. यह कैसे गणना की गई कि गैल वैल्यूम शीट की अनुमानित लागत 1400 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी और उसे 1127 रुपये प्रति वर्ग मीटर पर स्वीकार कर लिया गया?
. क्या कारण थे कि निगदू, उचाना और खेड़ी कलां का अतिरिक्त कार्य 26 मार्च, 2009 को प्रोफलेक्स सिस्टम को अलाट किया गया जबकि 25 मार्च, 2009 को बोर्ड निदेशालय की बैठक से एजेंडा नंबर 18 वापस ले लिया गया था
. गैल वैल्यूम शीट की हैफेड की तरफ से दी गई खरीद दर पर वेयरहाउसिंग कारपोरेशन ने उसी दर पर कैसे टेंडर दे दिया जबकि हैफेड की शर्तें अलग थी
. 590.21 लाख रुपये के कार्य आदेश 23 अप्रैल, 2010 को क्यों जारी किए गए जब तत्कालीन एमडी का 21 अप्रैल, 2010 को तबादला हो गया था?
खेमका पहले ही बता चुके हैं साजिश
जब सरकार ने इस मामले की सीबीआई से जांच कराने का फैसला किया था, तब अशोक खेमका ने उसे साजिश करार दिया था। खेमका ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा था कि गैल वैल्यूम शीट के गोदाम बनाने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी।
जिस तकनीक का उन्होंने इस्तेमाल किया था, उसका इस्तेमाल आज देश भर में लगभग अन्य सब एजेंसियां कर रही हैं। उन्होंने बेहद कम रेट पर टेंडर दिया था। गैल वैल्यूम शीट के गोदाम बनाने की मंजूरी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की फाइल पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दे रखी थी।